देहरादून। उत्तराखंड में बीते कई दिनों से हो रही बारिश आफत बन गई है। द्वितीय केदार मद्महेश्वर पैदल मार्ग बनतोली के पास भूस्खलन से लगभग 50 मीटर ध्वस्त हो गया, जिससे मद्महेश्वर लौट रहे सैकड़ों तीर्थयात्री मार्ग में फंस गए। सूचना मिलते ही एसडीआरएफ और डीडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और रस्सी के सहारे यात्रियों को सुरक्षित दूसरी तरफ लाया जा रहा है। वहीं, रिश के कारण गंगोत्री नेशनल हाईवे पर भी जगह-जगह भूस्खलन और भूधंसाव हुआ है।
उत्तराखंड आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि पैदल मार्ग में करीब 200 यात्री फंसे थे, जिन्हें रेस्क्यू टीमों द्वारा सुरक्षित निकाला जा रहा है। मार्ग पर मलबा हटाने का काम रविवार देर रात तक जारी रहा और दोनों छोरों से रस्सी बांधकर यात्री सुरक्षित निकाले गए। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग, ऊखीमठ की टीम भी बनतोली की ओर रवाना की गई।
बारिश के कारण गंगोत्री नेशनल हाईवे पर भी जगह-जगह भूस्खलन और भूधंसाव हुआ। डबराणी से सोनगाड़ तक कई स्थानों पर मार्ग 13 दिनों से बाधित है। रविवार को नालूपानी और सालंग पुल के पास भारी मलबा और बोल्डर गिरने से हाईवे बंद रहा। इसी कारण मुसाफिर और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हर्षिल घाटी में प्रभावित धराली और आठ अन्य सीमावर्ती गांवों में जिला प्रशासन ने खाद्यान्न आपूर्ति सुनिश्चित की। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के निर्देश पर ग्रामीणों तक सस्ते गल्ले की दुकानों से अग्रिम राशन पहुंचाया गया, ताकि आपदा से प्रभावित लोगों को राहत मिल सके।



