Health News : हैल्थ विशेषज्ञों का मानना है कि चाहे बच्चा हो या बुजुर्ग, रोज़ाना योग-व्यायाम की आदत डालना फिजिकल फिटनेस के साथ-साथ कई बीमारियों से दूर रखने में मदद करता है। इन्हीं लाभकारी योगाभ्यासों में से एक है ‘बालासन’ यानी चाइल्ड पोज। नाम से भले यह बच्चों के लिए बना आसन लगे, लेकिन योग विशेषज्ञ इसे हर उम्र के लोगों के लिए लाभकारी मानते हैं।विशेषज्ञों के मुताबिक, बालासन का नियमित अभ्यास शरीर और मन दोनों को गहरी शांति प्रदान करता है। इस आसन में शरीर पूरी तरह जमीन से जुड़ा होता है और ध्यान सांसों पर केंद्रित रहता है, जिससे तनाव और चिंता कम करने में मदद मिलती है। यह रीढ़ की हड्डी, कूल्हों, जांघों और टखनों को खिंचाव देता है, साथ ही लंबे समय तक बैठकर काम करने वालों के लिए कमर और पीठ दर्द से राहत दिलाने में सहायक है।
बालासन करते समय गहरी सांस लेने से मानसिक थकान और बेचैनी में कमी आती है। यह नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकालने में मदद करता है और सिर में रक्त संचार को बेहतर बनाकर एकाग्रता तथा नींद की गुणवत्ता को बढ़ाता है।साथ ही, इस आसन के दौरान पेट के निचले हिस्से पर हल्का दबाव पड़ता है, जिससे पाचन क्रिया सक्रिय होती है और पेट संबंधी दिक्कतों से बचाव होता है। आयुर्वेद भी भोजन के कुछ समय बाद इस आसन को करने की सलाह देता है। बालासन करने के लिए सबसे पहले वज्रासन में बैठें। गहरी सांस लेते हुए दोनों हाथों को सिर के ऊपर उठाएं और सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें। माथा जमीन से सटाएं और हाथों को सामने की ओर सीधा फैलाएं।
इस स्थिति में कुछ समय तक रहें, फिर धीरे-धीरे वापस वज्रासन की मुद्रा में आ जाएं। हालांकि, इसे करते समय कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। जिन लोगों को घुटनों या पीठ में तेज दर्द है, उन्हें इसे करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। हाई ब्लड प्रेशर या चक्कर आने की समस्या वाले लोगों को भी यह आसन सावधानी से करना चाहिए। योग विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर बालासन को सही तकनीक और नियमितता के साथ किया जाए, तो यह न केवल शरीर को लचीला और दर्द-मुक्त बनाएगा, बल्कि मानसिक शांति, बेहतर पाचन और गहरी नींद के लिए भी बेहद फायदेमंद साबित होगा।



