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फिर बदला मौसम का मिजाज: गर्मी के बीच बारिश की दस्तक, कई राज्यों के लिए अलर्ट जारी

नई दिल्ली। देशभर में जहां भीषण गर्मी ने अपनी उपस्थिति दर्ज करानी शुरू ही की थी, वहीं मौसम के बदलते मिजाज ने लोगों को फिलहाल राहत दी है। उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्सों में अचानक हुई हल्की से मध्यम बारिश के कारण तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विज्ञान विभाग के ताजा अनुमानों के मुताबिक, यह सिलसिला अभी थमने वाला नहीं है। आने वाले दिनों के लिए कई राज्यों में हल्की से लेकर भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जिसमें गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी भी शामिल है।

पूर्वोत्तर भारत में इस सप्ताह मानसून पूर्व की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। विभाग के अनुसार, असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। वहीं उत्तर-पश्चिमी भारत के हिमालयी क्षेत्रों में एक नया पश्चिमी विक्षोभ 17 मार्च की रात से सक्रिय होने वाला है। इस सिस्टम के प्रभाव से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश का दौर शुरू होगा। इसका असर मैदानी इलाकों पर भी दिखेगा, जहां 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के साथ छिटपुट बारिश होने की संभावना है।

मध्य और पूर्वी भारत के राज्यों जैसे झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और बिहार में भी इस सप्ताह मौसम अस्थिर रहेगा। इन क्षेत्रों में बिजली कड़कने और तेज हवाओं के साथ गरज-चमक की स्थिति बनी रह सकती है। वहीं पश्चिमी भारत की बात करें तो 17 से 19 मार्च के दौरान महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में मध्यम वर्षा का अनुमान है। कोंकण और गोवा में भी 18-19 मार्च के आसपास बिजली गिरने और गरज के साथ बौछारें पड़ने की चेतावनी दी गई है। दक्षिण भारत के कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में भी छिटपुट बारिश की संभावना जताई गई है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी आने वाले दिनों में मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आएगा। मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली के आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। शहर का अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 14 से 16 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की उम्मीद है। हालांकि, 18 मार्च की रात दिल्ली के कुछ हिस्सों में बहुत हल्की बूंदाबांदी या गरज-चमक के साथ 20-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। मौसम में आए इस बदलाव से खेती और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर भी विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है।

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