चंडीगढ़- हरियाणा पुलिस ने महिला सुरक्षा में एक ऐतिहासिक बदलाव हासिल किया है। महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 38 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है। 2024 के13,945 मामलों से घटकर 2025 में 8,723 मामले रह गए। यह संयोग नहीं है। यह एक सोची-समझी, बहुस्तरीय रणनीति का नतीजा है जो पुलिस व पब्लिक के बीच परस्पर बुनियादी भरोसे पर टिकी है। प्रदेश में महिला सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों का हवाला देते हुए हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल नेकहा, “महिला सशक्तिकरण, समानता और सम्मान के साथ महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना नितांत आवश्यक है”।
आँकड़ें दिशा दर्शाते हैं – प्राप्त आंकड़ों के अनुसार बलात्कार के मामले वर्ष 2021 में 1,716 से घटकर 2025 में 1,033 रह गए, और दर 12.33 सेगिरकर 7.06 प्रति लाख महिला आबादी पर आ गई।इसी अवधि में अपहरण के मामले 2,958 से घटकर1,249 हुए। पारिवारिक क्रूरता के मामले 5,755 से4,562 पर आ गए। यह सब तब हुआ जब महिलाओं की आबादी 2021 में 139.2 लाख से बढ़कर 2025 में 146.3 लाख हो गई। पुलिस के मनोबल को महिलाओं से जुड़े मामलों के 98 प्रतिशत निपटारे ने भीउत्साहित किया। बलात्कार और छेड़छाड़ सहित गंभीरअपराधों में बीते पांच सालों में लगातार कमी आई।
हर कदम पर सुरक्षा ढाल – यह मानते हुए कि महिलाओं को रोज़मर्रा की ज़िंदगी के हर पड़ाव पर अलग-अलग खतरों का सामना करना पड़सकता है, हरियाणा पुलिस ने घर पर, काम की जगह पर, सफर के दौरान और कानून के समक्ष, इन चारों मोर्चों पर खतरों से निपटने के लिए एक ढांचागत चहुं-आयामीतरीका अपनाया। कुशल एवं प्रशिक्षित महिला अधिकारियों द्वारा संचालित पूरे राज्य में 33 महिला पुलिस थाने और 365 महिला हेल्प डेस्क वैवाहिक विवाद, घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न और बाल विवाह के लिए गोपनीय, पीड़ित-केंद्रित सहायता देते हैं। वन स्टॉप सेंटर एकीकृत परामर्श और कानूनी मार्गदर्शन देते हैं। बगैर थाने जाए पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने की सुविधा है।
कामकाजी महिलाओं के काम की जगह पर, आंतरिक शिकायत समितियों की सक्रिय निगरानी की जाती है।महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए एक विशेष सरकारी वकील अलग से नियुक्त है। महिला उत्पीड़न मामलों में आरोपी व्यक्तियों के सरकारी लाभ रोक दिए जाते, यह स्पष्ट संदेश देने के लिए कि आपराधिक आचरण शुरू होते ही संस्थागत संरक्षण खत्म हो जाएगा।डायल-112 पर अभी 94 हजार कामकाजी महिलाएं तथा गर्ल स्टूडेंट्स पंजीकृत हैं। हरियाणा 112 के तहत ट्रिप मॉनिटरिंग सेवा महिलाओं को राज्य आपातकालीन प्रतिक्रिया केंद्र के साथ अपनी यात्रा की जानकारी साझा करने की सुविधा देती है। इतना ही नहीं , प्रदेश में इमरजेंसी रिस्पांस वाहनों का रिस्पांस टाइम फरवरी माह में 9 मिनट 32 सेकंड दर्ज किया गया है।
दुर्गा शक्ति मोबाइल ऐप एक बटन दबाते ही हरियाणा112 से जुड़ी आपात सुविधा देता है, जबकि दुर्गा शक्ति रैपिड एक्शन फोर्स की 24 कंपनियाँ, 50 समर्पित गश्ती वाहन सार्वजनिक स्थानों और परिवहन गलियारों पर सक्रिय गश्त बनाए रखती है।कानून के सामने, चिन्हित अपराध योजना के तहत महिलाओं के मामलों की तेज़ सुनवाई सुनिश्चित की जाती है, अनुसूचित जाति/जनजाति की पीड़ित महिलाओंको आर्थिक मुआवजा मिलता है, और एडीजीपी स्तर के अधिकारी की निगरानी में पुलिस मुख्यालय में एक समर्पित निगरानी प्रकोष्ठ यह सुनिश्चित करता है किमहिलाओं से जुड़ा कोई भी मामला ठंडा न पड़े।डीजीपी अजय सिंघल ने कहा, “हमने खुद से पूछा कि एक महिला सबसे ज़्यादा असुरक्षित कहाँ है — घर पर, काम पर, सफर में या अदालत में, और फिर हमने इन तमाम जगहों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चत करने के लिएकारगर कदम उठाए। एक ठोस संकल्प के साथ यह एक दृढ़ शुरुआत है कि प्रदेश की हरेक महिला की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित हो।“



