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विशेष स्वास्थ्य अभियान का एक सप्ताह: 2303 बाढ़ प्रभावित गांवों में 2.47 लाख मरीजों का किया गया इलाज, मलेरिया के सिर्फ 5 केस सामने आए

चंडीगढ़ : पंजाब सरकार द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चलाए जा रहे “विशेष स्वास्थ्य अभियान” के पहले सप्ताह के पूरे होने पर शानदार नतीजे सामने आए हैं। इस दौरान मेडिकल टीमों ने 2303 बाढ़ प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाए और 2,47,958 से अधिक ओपीडी परामर्श किए। यह जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने यहां दी। इस बड़े प्रयास के चलते 31,717 बुखार के केस, 7,832 दस्त के केस, 36,119 त्वचा संक्रमण और 16,884 आंखों की बीमारी के मामलों का त्वरित इलाज संभव हुआ है, जिससे किसी बड़े प्रकोप को रोका जा सका।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने 14 सितंबर को 2303 बाढ़ प्रभावित गांवों में “विशेष स्वास्थ्य अभियान” की अगुवाई के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों — सरकारी डॉक्टरों, नव नियुक्त मेडिकल अधिकारियों, निजी वॉलंटियरों, आयुर्वेदिक मेडिकल अधिकारियों और एमबीबीएस इंटन्र्स — को तैनात करने के निर्देश दिए थे।14 सितंबर से अब तक के आंकड़े जारी करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि पहले से ही रोकथाम की रणनीति पर विशेष ध्यान दिया गया था, जिसके कारण महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए हैं। 20,000 से अधिक आशा वर्करों ने 7 लाख से अधिक घरों में जाकर जांच की और इस दौरान केवल 5 मलेरिया के केस सामने आए। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य टीमों द्वारा इस अवधि में 2.27 लाख आवश्यक स्वास्थ्य किटें भी वितरित की गईं।

डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि ये आंकड़े स्वास्थ्य संकट की सफल रोकथाम को दर्शाते हैं। जहां बड़े प्रकोप की आशंका थी, वहीं हमारी अग्रिम रोकथाम रणनीति ने लोगों के चारों ओर एक मज़बूत स्वास्थ्य कवच तैयार किया है। मलेरिया के बेहद कम मामले सामने आना और अन्य बीमारियों का व्यवस्थित प्रबंधन यह दर्शाता है कि हमारी त्रि-स्तरीय रणनीति ज़मीनी स्तर पर प्रभावशाली ढंग से काम कर रही है। इसी प्रकार, तीव्र वेक्टर-नियंत्रण अभियानों के तहत 6.22 लाख घरों को मच्छरों के प्रजनन की पहचान के लिए कवर किया गया, 11,582 घरों में प्रजनन स्थलों को ढूंढकर नष्ट किया गया। एक महत्वपूर्ण रोकथाम उपाय के रूप में 1.43 लाख घरों पर अग्रिम लार्वीसाइड का छिडक़ाव किया गया और रोग संचरण चक्र को तोडऩे के लिए सभी बाढ़ प्रभावित गांवों में व्यापक फ्यूमिगेशन किया गया।

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