HomeNationalजब उनका कोई दोष नहीं है तो इस्तीफा क्यों देंगे शिक्षा मंत्री...

जब उनका कोई दोष नहीं है तो इस्तीफा क्यों देंगे शिक्षा मंत्री -रिजिजू 

नई दिल्ली। देश में नीट परीक्षा और सीबीएसई से जुड़े मुद्दों को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का रुख स्पष्ट किया है। परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर विपक्ष और विभिन्न संगठनों द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही है। इस तनावपूर्ण माहौल में एक विशेष साक्षात्कार के दौरान जब केंद्रीय मंत्री से पूछा गया कि यदि आज भाजपा विपक्ष में होती, तो क्या वह भी शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगती? इस पर एक इंटरव्यू में रिजिजू ने जवाब देते हुए कहा कि व्यवस्था को समझने में एक बुनियादी फर्क है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी घोटाले या धोखाधड़ी में सीधे तौर पर मंत्री या उनके निजी स्टाफ की संलिप्तता होती है, तो निश्चित रूप से उसकी जिम्मेदारी मंत्री की बनती है।

परंतु, जब किसी स्वायत्त संस्था के भीतर कोई तकनीकी या प्रशासनिक समस्या उत्पन्न होती है, तो उसके लिए वह संस्था ही सीधे तौर पर जवाबदेह होती है।केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि सीबीएसई और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) जैसी संस्थाएं पूरी तरह से स्वायत्त हैं और इनके दैनिक कामकाज या निगरानी में शिक्षा मंत्री का सीधा हस्तक्षेप नहीं होता है। उन्होंने पिछले एक दशक से अधिक समय का हवाला देते हुए कहा कि बीते 12 वर्षों में मौजूदा सरकार के किसी भी मंत्री पर रिश्वतखोरी, कमीशन लेने या सरकारी तंत्र के साथ छेड़छाड़ करने के सीधे आरोप नहीं लगे हैं। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जब वर्तमान सत्तापक्ष विपक्ष में हुआ करता था, तब तत्कालीन सरकार के मंत्रियों के खिलाफ हर महीने बड़े घोटाले सामने आते थे। इसलिए कांग्रेस और वर्तमान सरकार की कार्यप्रणाली के बीच के इस बड़े अंतर को जनता को समझना चाहिए।

इसी दौरान, हाल ही में उभरे राजनीतिक संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) से जुड़े सवालों पर भी रिजिजू ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के तहत किसी को भी नया राजनीतिक दल बनाने का पूरा अधिकार है, परंतु किसी को भी देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का मजाक बनाने या उसे कमजोर करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह नया संगठन केवल कांग्रेस के वोट बैंक के लिए चुनौती पेश कर रहा है, इसलिए इस पर चिंता करने की जरूरत भाजपा को नहीं बल्कि कांग्रेस को है। दूसरी तरफ, इस पूरे मुद्दे को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ एक बड़े और व्यापक देशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments