नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार के 12 साल विकास और विरासत के संगम का स्वर्णिम युग रहे हैं। इन 12 सालों में, एक ओर जहां राम मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और उज्जैन महाकाल लोक का निर्माण हुआ, वहीं दूसरी ओर पीएम आवास, आयुष्मान भारत, अन्न भंडार, विश्व स्तरीय कनेक्टिविटी, इंफ्रास्ट्रक्चर और मेक इन इंडिया जैसी योजनाओं ने देश की विकास यात्रा को अभूतपूर्व गति दी है।मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह बयान ऐसे समय में आया है जब सरकार विकास भी, विरासत भी की थीम के तहत पिछले 12 सालों में की गई पहलों को उजागर कर रही है।
सरकारी बयान के मुताबिक विरासत संरक्षण को व्यापक विकास लक्ष्यों के साथ जोड़ते हुए भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, विकास और प्रचार-प्रसार पर ध्यान केंद्रित किया गया है। बयान में कहा गया है कि मुख्य पहलों में एक करोड़ रिकॉर्ड का डिजिटाइज़ेशन, 668 प्राचीन कलाकृतियों की वापसी, आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम के 11 म्यूज़ियम बनाना और 11 भारतीय भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देना शामिल है।रिपोर्ट के मुताबिक बताया गया है कि पिछले कुछ सालों में मशहूर जगहों को फिर से ठीक करने, आने वाले लोगों के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाने और हेरिटेज शहरों व तीर्थयात्रा सर्किट को विकसित करने के कार्यक्रम शुरू किए गए हैं।
भारत की सांस्कृतिक संपत्तियां जिनमें स्मारक, प्राचीन वस्तुएं, पांडुलिपियां और ऐतिहासिक स्थल शामिल हैं पीढ़ियों से चली आ रही एक साझा विरासत का प्रतिनिधित्व करती हैं। इसमें कहा गया है कि 2014 से सरकार ने इन संपत्तियों को संरक्षित और बढ़ावा देने के लिए कई उपाय किए हैं, साथ ही विरासत के विकास को आर्थिक विकास, पर्यटन, आजीविका और सांस्कृतिक कूटनीति से जोड़ा है।पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार ने विरासत के संरक्षण को राष्ट्रीय विकास से जोड़ने की कोशिश की है। इसमें चोरी हुई 668 से ज़्यादा प्राचीन वस्तुओं की वापसी, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और राममंदिर जैसे आध्यात्मिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, और भारतीय परंपराओं को वैश्विक पहचान दिलाने के प्रयासों पर ज़ोर दिया गया है।



