लखनऊ । उत्तरप्रदेश में 127 राजनीतिक दलों को चुनाव आयोग ने नोटिस दे दिया है। यह नोटिस वित्तीय वर्ष 2021-22, 2022-23 और 2023-24 के वार्षिक लेखापरीक्षित खाते और 2019 के बाद से हुए चुनावों के खर्च का ब्यौरा जमा न करने के कारण भेजा गया है। इन पार्टियों में समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) भी शामिल है।आयोग के मुताबिक इन 127 पार्टियों ने बीते तीन वित्तीय वर्षों के ऑडिट किए गए खाते और 2019 से अब तक हुए लोकसभा और विधानसभा चुनावों के खर्च का विवरण तय समय में जमा नहीं किया।
चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, विधानसभा चुनाव के 75 दिन और लोकसभा चुनाव के 90 दिन के भीतर चुनावी खर्च का ब्यौरा जमा करना अनिवार्य है। इन दलों के अध्यक्ष और महासचिव को 3 अक्टूबर, 2025 तक लखनऊ स्थित कार्यालय में अपना जवाब, शपथ-पत्र और संबंधित दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया गया है।
इस मामले में सुनवाई 6, 7, 8 और 9 अक्टूबर, 2025 को सुबह 10 बजे से होगी। यदि निर्धारित समय में जवाब नहीं दिया जाता है, तो यह माना जाएगा कि पार्टियों के पास कुछ कहने के लिए नहीं है, और मामले की रिपोर्ट भारत निर्वाचन आयोग को भेज दी जाएगी।
शामिल पार्टियों के नाम: जिन पार्टियों को नोटिस भेजा गया है, उसमें आदर्शवादी कांग्रेस पार्टी, अभय समाज पार्टी, अखंड राष्ट्रवादी पार्टी, बहुजन पार्टी, आज़ाद समाज पार्टी, जनहित किसान पार्टी, जनता राज पार्टी, हमदर्द पार्टी, लोकदल, लोकतांत्रिक जनशक्ति पार्टी, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया), राष्ट्रीय अपना दल, राष्ट्रीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय राष्ट्रवादी पार्टी शामिल हैं।प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) सपा के कद्दावर नेता और विधायक शिवपाल यादव की पार्टी बताई जा रही है। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी की स्थापना सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने 29 अगस्त 2018 को की थी।
अपने भतीजे और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से दूरियां बढ़ जाने के बाद उन्होंने समाजवादी मूल्यों की रक्षा के लिए प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) बनाने का फैसला किया था। मुलायम के निधन के बाद दिसंबर 2022 में हुए मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव में पार्टी सुप्रीमो शिवपाल यादव ने अपनी बहू और सपा प्रत्याशी डिंपल यादव को समर्थन का ऐलान कर उनके पक्ष में सभाएं भी की थी। चुनाव के नतीजों के ऐलान के साथ ही शिवपाल यादव ने प्रसपा के सपा में विलय का ऐलान कर दिया था। इसके बाद से फिर से पूरा परिवार एकजुट हो गया है।



