नई दिल्ली। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर ग्रामीण मजदूरी के आंकड़ों में बड़े पैमाने पर हेरफेर करने का गंभीर आरोप लगा दिया है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कटाक्ष कर कहा कि आंकड़ों की हेराफेरी ही मोदी सरकार का ‘एंटायर पॉलिटिकल साइंस’ बन गया है। कांग्रेस नेता रमेश ने दावा किया कि सरकारी रिपोर्टों में जून 2025 से मार्च 2026 के बीच वार्षिक ग्रामीण मजदूरी वृद्धि करीब छह से बढ़ाकर 17-18 प्रतिशत दिखाया गया है। वहीं, औसत दैनिक मजदूरी में केवल एक महीने के भीतर 12.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो अविश्वसनीय प्रतीत होती है।
पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री ने याद दिलाया कि 2024 में भी कांग्रेस ने मोदी सरकार पर रोजगार सृजन के आंकड़ों में ऐसी ही ‘हेरफेर’ का आरोप लगाया था। तब भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से रोजगार की परिभाषा बदलकर वित्त वर्ष 2018 के बाद से 16.8 करोड़ नए रोजगार सृजित होने का दावा किया गया था, जिसके बाद आरबीआई के शीर्ष नेतृत्व को महत्वपूर्ण पदों से नवाजा गया था।कांग्रेस नेता का कहना है कि भारत की आर्थिक सुस्ती का मूल कारण वास्तविक (महंगाई-समायोजित) मजदूरी में ठहराव है।
यह ठहराव उपभोग वृद्धि को कमजोर कर रहा है और निजी निवेश को हतोत्साहित कर रहा है। इस मूल समस्या का समाधान करने में विफल रहने के बाद, सरकार अब ग्रामीण मजदूरी में कृत्रिम उछाल दिखाने का प्रयास कर रही है। रमेश ने आरोप लगाया कि यह कथित मजदूरी वृद्धि वास्तव में कार्यप्रणाली में बदलाव का परिणाम है, न कि वास्तविक प्रगति का। उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि यदि मजदूरी के आंकड़ों का सही विश्लेषण किया जाए, तब वास्तविक वार्षिक मजदूरी वृद्धि लगभग 4.3 प्रतिशत ही होती, जो पिछले चार वर्षों में सबसे कमजोर वृद्धि मानी जाती।



