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21 घंटे के संघर्ष के बाद बोरवेल में गिरे मासूम निर्भय ने तोड़ा दम

अंबाला। हरियाणा के अंबाला जिले के धनौरा गांव में उस वक्त मातम छा गया जब एक खुले बोरवेल में गिरे चार वर्षीय बच्चे निर्भय को 21 घंटे तक चले अथक बचाव अभियान के बाद भी बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया है, जिससे पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। यह हृदयविदारक घटना उस समय हुई जब मासूम निर्भय खेलते-खेलते अचानक खुले पड़े बोरवेल में जा गिरा था। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस-प्रशासन, भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए युद्ध स्तर पर बचाव अभियान शुरू किया गया था।

बच्चे को बाहर निकालने के लिए बचाव दल ने चौबीसों घंटे काम किया। बोरवेल के समानांतर एक गड्ढा खोदा गया, जिसमें ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई और लगातार बच्चे की स्थिति पर कैमरों के माध्यम से नजर रखी जा रही थी। हालांकि, 21 घंटों की लगातार कोशिशों के बाद जब आखिरकार बच्चे को बोरवेल से बाहर निकाला गया, तो उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसकी जांच की। मेडिकल ऑफिसर डॉ. ऋषिपाल के मुताबिक ऑपरेशन के दौरान रेस्क्यू वाली जगह पर आप में से कई लोग सुबह से ही मौजूद थे। कई घंटों की लगातार कोशिशों के बाद बच्चे को आखिरकार बाहर निकाला गया और तुरंत इमरजेंसी डिपार्टमेंट में भेजा गया। रेस्क्यू वाली जगह पर ही हमने देखा कि बच्चे की हालत बहुत गंभीर थी। जब उसे अस्पताल लाया गया, तो हमने ईसीजी किया, जिससे पुष्टि हुई कि बच्चे की मौत हो चुकी थी। इसके बाद शव को मॉर्चरी में भेज दिया गया।

एनडीआरएफ के असिस्टेंट कमांडेंट अनिल कुमार ने बचाव अभियान के दौरान आई चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि, सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि बच्चा पानी में डूबा हुआ था। एक और बड़ी चुनौती बोरवेल की गहराई थी। बच्चा बोरवेल की अंदरूनी दीवार से बुरी तरह फंसा हुआ था। बच्चे के शरीर और बोरवेल की दीवार के बीच लगभग कोई जगह नहीं थी, यहां तक कि उसके हाथ और दीवार के बीच भी इतनी जगह नहीं थी। यह दर्शाता है कि बचाव कार्य कितना जटिल और खतरनाक था। मृतक निर्भय के चाचा ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि, प्रशासन ने हमें पूरा सहयोग दिया। गांव वालों, पुलिस, सेना और सभी रेस्क्यू टीमों ने ऑपरेशन के दौरान हमारी मदद की। गांव वालों ने भी पूरे दिल से सहयोग किया। उन्होंने इस कठिन समय में सभी के समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया, भले ही परिणाम दुखद रहा।

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