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भगवंत मान सरकार ने जमीनी स्तर पर ‘युद्ध नशों  विरुद्ध’ अभियान को और मजबूत किया; ‘गांवों का हाल’ एक्शन प्लान लागू

चंडीगढ़ : नशा विरोधी अभियान ‘युद्ध नशों  विरुद्ध’ को जमीनी स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाते हुए भगवंत मान सरकार ने ‘गांवों का हाल’ एक्शन प्लान का क्रियान्वयन शुरू कर दिया है। यह एक सुव्यवस्थित कार्ययोजना है, जिसका उद्देश्य जनस्तर पर भागीदारी बढ़ाना तथा नशों के विरुद्ध लड़ाई में लोगों को अधिक सक्रिय रूप से शामिल करना है। इस एक्शन प्लान को जून माह में मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक ‘गांवों का हाल, सीएम के साथ’ के दौरान अंतिम रूप दिया गया था। यह योजना विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, नियमित निगरानी तथा पूरे राज्य में निरंतर जनभागीदारी सुनिश्चित करती है।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य नशों के विरुद्ध संघर्ष में गांव स्तर पर लोगों की सहभागिता बढ़ाना है। एक्शन प्लान में जिला एवं राज्य स्तरीय समीक्षा बैठकें, प्रत्येक गांव के लिए विशेष नशा विरोधी रणनीति तथा पूरे पंजाब में इसके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए निगरानी तंत्र शामिल किया गया है।इस पूरी प्रक्रिया का प्रमुख आधार ‘नशा मुक्ति मोर्चा’ है, जिसका गठन 15 अप्रैल 2025 को किया गया था। इसके साथ ही पांच रणनीतिक क्षेत्रों में व्यापक नशा विरोधी जनजागरूकता अभियान भी प्रारंभ किया गया।प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग तथा स्थानीय समुदाय के बीच ब्लॉक कोऑर्डिनेटर महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं। वे जागरूकता अभियान चलाने के साथ-साथ नशा पीड़ितों के पुनर्वास में सहयोग, सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने तथा रोकथाम संबंधी गतिविधियों को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस नेटवर्क को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए पूरे पंजाब में जिला स्तरीय समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जिनमें ब्लॉक कोऑर्डिनेटर, ग्राम रक्षा समिति के सदस्य तथा स्थानीय प्रशासन के अधिकारी भाग ले रहे हैं। इन बैठकों का उद्देश्य अभियान की जमीनी स्थिति का आकलन करना, स्थानीय चुनौतियों की पहचान करना तथा नशा विरोधी अभियान से जुड़े सभी पक्षों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है।वर्तमान समय में पंजाब में 1,708 ब्लॉक कोऑर्डिनेटर कार्यरत हैं, जो 1.25 लाख से अधिक ग्राम रक्षा समिति सदस्यों के साथ मिलकर जनजागरूकता फैलाने, उपचार एवं पुनर्वास को प्रोत्साहित करने तथा नशाखोरी एवं नशा तस्करी के विरुद्ध सामुदायिक सतर्कता बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं।

इन समीक्षा बैठकों के माध्यम से अभियान के अंतिम स्तर तक प्रभावी क्रियान्वयन को और अधिक व्यवस्थित बनाया जाएगा। इसके लिए ब्लॉक कोऑर्डिनेटरों की भूमिका को सशक्त करने के साथ-साथ श्रेष्ठ कार्य प्रणालियों को अपनाने और साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा तथा अभियान में आम लोगों की अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। बैठकों के माध्यम से परिवारों को नशा पीड़ित सदस्यों का समय पर उपचार कराने के लिए प्रेरित करने तथा आम जनता को नशा तस्करों के विरुद्ध सतर्क रहने पर विशेष बल दिया जा रहा है।

जिला-वार समीक्षा प्रक्रिया की शुरुआत 6 जुलाई को तरनतारन, अमृतसर (शहरी) और अमृतसर (ग्रामीण) से हुई। इसके बाद 7 जुलाई को गुरदासपुर और पठानकोट में बैठकें आयोजित की गईं। इसके पश्चात होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, एस.बी.एस. नगर, रूपनगर, एस.ए.एस. नगर तथा पटियाला (शहरी) में भी बैठकें सम्पन्न हो चुकी हैं।जनसंपर्क अभियान के अगले चरण में 11 जुलाई को संगरूर, पटियाला (ग्रामीण) तथा मालेरकोटला; 12 जुलाई को बरनाला, बठिंडा तथा मानसा; 13 जुलाई को श्री मुक्तसर साहिब, फिरोजपुर तथा फाजिल्का; 14 जुलाई को फरीदकोट, मोगा तथा लुधियाना (शहरी); तथा 15 जुलाई को लुधियाना (ग्रामीण-1), लुधियाना (ग्रामीण-2) एवं फतेहगढ़ साहिब में बैठकें आयोजित की जाएंगी।

इस अभियान का उद्देश्य नशा तस्करों के विरुद्ध लगातार की जा रही कार्रवाई के साथ-साथ नशों के विरुद्ध जन आंदोलन में अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित करना है। ब्लॉक कोऑर्डिनेटरों के जमीनी स्तर के नेटवर्क को और अधिक मजबूत करते हुए गांव स्तरीय संस्थाओं, युवाओं तथा शैक्षणिक संस्थानों को सक्रिय बनाकर सरकार का लक्ष्य नशों की समस्या के विरुद्ध दीर्घकालिक सामाजिक जागरूकता, सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना तथा पंजाब को नशामुक्त राज्य बनाने के संकल्प को आगे बढ़ाना है।

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