Health News : तनाव एवं थकान भगाने के लिए सरल लेकिन प्रभावी योगासन है बालासन, जिसे अंग्रेज़ी में चाइल्ड पोज़ कहा जाता है। यह मुद्रा न केवल तनाव और चिंता को कम करने में मदद करती है बल्कि शरीर की लचीलापन क्षमता को भी बढ़ाती है। संस्कृत शब्द बाल यानी बच्चा और आसन यानी मुद्रा से मिलकर बना यह योगासन शरीर को गहराई से विश्राम देता है। इसे करने के लिए सबसे पहले जमीन पर घुटनों के बल बैठा जाता है और नितंबों को एड़ियों पर टिकाया जाता है। फिर शरीर को धीरे-धीरे आगे झुकाते हुए माथे को जमीन पर लगाना होता है। दोनों हाथ सामने की ओर फैलाकर या शरीर के साथ रखते हुए इस मुद्रा में 30 सेकंड से 1 मिनट तक गहरी सांसों के साथ रहना चाहिए।
इस आसान से आसन का नियमित अभ्यास न केवल मांसपेशियों को आराम देता है बल्कि मानसिक तनाव, थकान और चिंता जैसी समस्याओं से भी राहत प्रदान करता है। भारत सरकार का आयुष मंत्रालय भी बालासन के लाभों को मान्यता देता है। उनके अनुसार, यह आसन तंत्रिका तंत्र को शांत करता है और दिमाग को गहराई से आराम देता है। साथ ही यह पाचन क्रिया को सुधारता है, जिससे कब्ज, अपच और गैस जैसी समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है। खासतौर पर ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करने वालों के लिए यह आसन बेहद उपयोगी साबित होता है।
यह रीढ़ की हड्डी को सीधा और मजबूत बनाता है तथा पीठ दर्द से राहत देता है। यह कूल्हों, जांघों और घुटनों की मांसपेशियों को भी सक्रिय करता है, जिससे शरीर में लचीलापन और रक्तसंचार बेहतर होता है। इसका अभ्यास अनिद्रा में भी लाभकारी है और गहरी नींद लाने में मदद करता है। हालांकि, गर्भवती महिलाओं या जिनको पीठ या घुटनों की गंभीर समस्याएं हैं, उन्हें यह आसन करने से पहले योग विशेषज्ञ या डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। बालासन को सुबह खाली पेट या भोजन के कम से कम तीन घंटे बाद करना अधिक लाभकारी माना जाता है।



