चंडीगढ़-भारत के उपराष्ट्रपति और पंजाब विश्वविद्यालय के पदेन कुलाधिपति, सी. पी.राधाकृष्णन ने आज पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ का दौरा किया। अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने परिष्कृत विश्लेषणात्मक उपकरण सुविधा/केंद्रीय उपकरण प्रयोगशाला (SAIF/CIL) में उन्नत उपकरण सुविधा का उद्घाटन किया। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी टेक इनोवेशन फोरम (PU-TIF) का भी उद्घाटन किया। SAIF/CIL और PU-TIF शैक्षणिक, अनुप्रयुक्त और व्यावहारिक अनुसंधान के लिए विश्वविद्यालय के पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण घटक हैं, जो शोधकर्ताओं, नवोन्मेषकों और उद्योगों को उन्नत विश्लेषणात्मक, इनक्यूबेशन और उद्यमशीलता सहायता प्रदान करते हैं।
सभा को संबोधित करते हुए, सी. पी. राधाकृष्णन ने 1882 में स्थापना के बाद से विश्वविद्यालय की विशिष्ट विरासत को याद किया और नेताओं, न्यायविदों, वैज्ञानिकों, खिलाड़ियों और लोक सेवकों की पीढ़ियों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में इसके योगदान का उल्लेख किया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का उच्च शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र एक परिवर्तनकारी दौर से गुजरा है। उन्होंने कहा कि भारत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के वैश्विक गंतव्य के रूप में उभर रहा है। आज के उद्धाटनों को दो महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताते हुए, सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि एटॉमिक फोर्स माइक्रोस्कोप, रामन स्पेक्ट्रोमीटर, डीएनए अनुक्रमणिका, फ्लो साइटोमीटर और एफटीआईआर स्पेक्ट्रोमीटर जैसे पांच उन्नत वैज्ञानिक उपकरणों की स्थापना से नैनोटेक्नोलॉजी, सामग्री विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान और जीनोमिक्स सहित विभिन्न क्षेत्रों में विश्वविद्यालय की अनुसंधान क्षमताओं को मजबूती मिलेगी।
नवाचार के महत्व पर जोर देते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि बायो-नेस्ट का धारा 8 गैर-लाभकारी कंपनी के रूप में ‘पंजाब यूनिवर्सिटी टेक इनोवेशन फोरम’ में रूपांतरण अनुसंधान, उद्यमिता और प्रौद्योगिकी विकास को आगे बढ़ाने के लिए एक नए संस्थागत ढांचे का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि नवाचार तब फलता-फूलता है जब शिक्षा जगत, उद्योग, इनक्यूबेटर और निवेशक मिलकर काम करते हैं।युवा शोधकर्ताओं को संबोधित करते हुए, उन्होंने उनसे उद्देश्य के साथ विज्ञान का अनुसरण करने, विफलता के सामने लचीले रहने और ऐसे नवाचारों को विकसित करने का आग्रह किया जो समावेशी, स्केलेबल और वास्तविक सामाजिक जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हों। उन्होंने कहा कि अनुसंधान का समाज पर सार्थक प्रभाव पड़ना चाहिए। उन्होंने शोधकर्ताओं और छात्रों से सही दिशा में अनुसंधान करने का आह्वान किया ताकि इसका लाभ बड़े पैमाने पर समाज तक पहुंचे।
उपराष्ट्रपति ने कैंपस सुरक्षा का भी जिक्र किया और कहा कि एक पीएच.डी. छात्र के दुखद निधन के बाद, उन्होंने तुरंत विश्वविद्यालय अधिकारियों को पूरे परिसर का व्यापक सुरक्षा ऑडिट करने का निर्देश दिया था। उन्होंने बताया कि मौजूदा बुनियादी ढांचे की समीक्षा और विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए एक आंतरिक समिति का गठन किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा और भलाई विश्वविद्यालय की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।छात्रों से ‘नशा मुक्त भारत’ में योगदान देने का आह्वान करते हुए, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने उनसे मादक पदार्थों के सेवन से दूर रहने और अपने परिवारों तथा दोस्तों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करने का आग्रह किया।अपने संबोधन का समापन करते हुए, उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि उन्नत वैज्ञानिक सुविधाएं और पंजाब यूनिवर्सिटी टेक इनोवेशन फोरम अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता में विश्वविद्यालय के योगदान को और मजबूत करेंगे।
उन्होंने छात्रों और संकाय से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि कक्षाओं और प्रयोगशालाओं से उभरने वाले विचार युवाओं के लिए अवसरों में बदलें और विकसित भारत तथा आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण में योगदान दें।उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय को उच्च शिक्षा और अनुसंधान के एक विश्वस्तरीय संस्थान में बदलने के उपायों पर विश्वविद्यालय समुदाय से सुझाव आमंत्रित किए।इस अवसर पर पंजाब के राज्यपाल एवं प्रशासक यू.टी. चंडीगढ़, गुलाब चंद कटारिया; हरियाणा के राज्यपाल, प्रो. असीम कुमार घोष; लोकसभा सांसद, मनीष तिवारी; पंजाब विश्वविद्यालय की कुलपति, प्रोफेसर मीनाक्षी गोयल और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।



