भगवंत मान सरकार टीबी सहित अन्य बीमारियों के मरीजों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध: डॉ. बलबीर सिंह
पटियाला- पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने तपेदिक (टीबी) के खिलाफ लड़ाई को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया है। राज्यपाल ने आज सरकारी मेडिकल कॉलेज, पटियाला में पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के साथ तपेदिक (टीबी) एवं फेफड़ों की बीमारियों पर 81वें राष्ट्रीय सम्मेलन ‘नैटकॉन-2026’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि टीबी का उन्मूलन केवल सरकार या स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए हम सभी को संकल्प लेना होगा कि कोई भी टीबी मरीज समय पर जांच से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि टीबी के खिलाफ जागरूकता को जन आंदोलन तथा लोगों की सक्रिय भागीदारी का अभियान बनाने की आवश्यकता है।
राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने वर्ष 1939 में स्थापित ट्यूबरकुलोसिस एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा दशकों से भारत में टीबी नियंत्रण, जन जागरूकता, चिकित्सा शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में किए जा रहे योगदान की सराहना की। उन्होंने संस्था को देश की विभिन्न भाषाओं में टीबी संबंधी बुकलेट प्रकाशित कर व्यापक जागरूकता फैलाने के लिए भी प्रेरित किया। राज्यपाल ने टीबी मरीजों की पहचान कर उन्हें उपचार उपलब्ध करवाने के साथ-साथ पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने ‘निक्षय मित्र’ योजना के माध्यम से टीबी मरीजों का हाथ थामा है, जबकि इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी भी ऐसे मरीजों की मदद कर रही है।
गुलाब चंद कटारिया ने पंजाब में प्रति लाख आबादी पर टीबी मरीजों की संख्या राष्ट्रीय औसत से अधिक होने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पंजाब ने वर्ष 2030 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उच्च जोखिम वाली आबादी तक पहुंच, समय पर जांच, मरीजों को निरंतर उपचार, पर्याप्त पोषण और सामाजिक सहायता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।हालांकि, राज्यपाल ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि पिछले दस वर्षों के दौरान देश में टीबी के मामलों में 21 प्रतिशत की कमी आई है और अब 92 प्रतिशत टीबी मरीजों का उपचार किया जा रहा है, जबकि मृत्यु दर में भी 28 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
राज्यपाल कटारिया ने सभी स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों की टीबी संबंधी स्क्रीनिंग करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पहले यह धारणा थी कि टीबी का मरीज अवश्य मर जाता है, लेकिन अब टीबी का उपचार संभव है और मरीज की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि जब टीबी मरीज की पहचान हो जाती है तो उसे उपचार और पौष्टिक आहार के साथ-साथ सम्मानजनक व्यवहार की भी आवश्यकता होती है।राज्यपाल ने कहा कि टीबी केवल एक संक्रामक बीमारी नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है, जो एक व्यक्ति, उसके परिवार और अंततः पूरे समाज को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी से निपटने के लिए शीघ्र पहचान, समय पर उपचार, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, निवारक उपचार, पोषण, उपचार की निरंतरता और सामाजिक कलंक को कम करने के लिए एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार टीबी मरीजों के साथ-साथ एचआईवी और हेपेटाइटिस के मरीजों को भी पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ऐसे मरीजों के राशन कार्ड बनाने के लिए भी सरकार द्वारा कदम उठाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने राज्यपाल कटारिया से अपील की कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के दायरे में लाए गए पंजाब के 65 लाख परिवारों को पीजीआई, चंडीगढ़ में भी मुफ्त उपचार की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए कदम उठाए जाएं।डॉ. बलबीर सिंह ने इंडियन ट्यूबरकुलोसिस एसोसिएशन सहित सभी डॉक्टरों से अपील की कि वे देश की आबोहवा को बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार सहित सभी राज्यों की सरकारों को उचित कदम उठाने के लिए पत्र लिखें।
स्वास्थ्य मंत्री ने पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार की पहली प्राथमिकताएं हैं।राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान डॉ. विश्वा कटोच, चेयरमैन ट्यूबरकुलोसिस एसोसिएशन डॉ. वी.के. वोहरा, नैटकॉन-2026 के अध्यक्ष डॉ. सूर्य कांत, साइंटिफिक कमेटी के चेयरमैन डॉ. एस.के. जिंदल, पंजाब स्टेट रेड क्रॉस सोसाइटी के सचिव श्री शिवदुलार सिंह ढिल्लों, डिप्टी कमिश्नर डॉ. हिमांशु अग्रवाल, एस.एस.पी. डॉ. हरमनदीप सिंह हाँस, ए.डी.सी. नवरीत कौर सेखों, डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन डॉ. अवनीश कुमार, डायरेक्टर-प्रिंसिपल डॉ. आर.पी.एस. सिबिया सहित बड़ी संख्या में अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
इस अवसर पर राजिंदरा अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट एवं ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन डॉ. विशाल चोपड़ा ने स्वागत करते हुए बताया कि वर्ष 1956 के बाद दूसरी बार पटियाला में आयोजित हो रहे इस सम्मेलन में देशभर से लगभग 500 प्रतिनिधि पहुंचे हैं। इनमें प्रमुख पल्मोनोलॉजिस्ट (फेफड़ों के रोगों के विशेषज्ञ), टीबी विशेषज्ञ, मेडिकल फैकल्टी, शोधकर्ता और पोस्ट-ग्रेजुएट विद्यार्थी शामिल हैं। ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. क्रांति गर्ग ने धन्यवाद करते हुए बताया कि तीन दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन में वैज्ञानिक सत्र, विशेषज्ञों के व्याख्यान, शोध प्रस्तुतियां तथा तपेदिक और श्वसन प्रणाली की अन्य बीमारियों की जांच, उपचार और रोकथाम के क्षेत्र में हुई नई प्रगति पर विचार-विमर्श किया जाएगा।



