चंडीगढ़। प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों, पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआई) और पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) के कुल 111 शोधकर्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शहर का नाम रोशन किया है। इन्हें स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर द्वारा 2026 में जारी दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की प्रतिष्ठित सूची में जगह मिली है। यह उपलब्धि चिकित्सा से लेकर पर्यावरण विज्ञान तक, विभिन्न क्षेत्रों में चंडीगढ़ के गहन शोध कार्यों के वैश्विक प्रभाव को दर्शाती है।सूची में पीजीआई के 55 वैज्ञानिक शामिल हैं, जिनमें से 21 को पूरे करियर के शोध प्रभाव पर आधारित लाइफटाइम श्रेणी में और शेष को वार्षिक शोध प्रभाव श्रेणी में स्थान मिला है।
इसी तरह, पंजाब विश्वविद्यालय के 56 शोधकर्ताओं ने अपनी जगह बनाई है, जिनमें 28 लाइफटाइम श्रेणी में और 54 वार्षिक श्रेणी में हैं। उल्लेखनीय है कि पीयू के 26 शोधकर्ताओं के नाम दोनों श्रेणियों में साझा हैं, जिससे कुल 56 अद्वितीय शोधकर्ता सूची में शामिल हुए। इन वैज्ञानिकों का चयन स्कोपस डेटाबेस के विस्तृत आंकड़ों के आधार पर किया गया है। इसमें शोध प्रकाशनों की संख्या, अन्य वैज्ञानिकों द्वारा दिए गए उद्धरण (साइटेशन), एच-इंडेक्स, सह-लेखकत्व और शोधपत्रों में लेखक की भूमिका जैसे कई मानकों का आकलन होता है। वार्षिक श्रेणी में वर्ष 2025 के शोध कार्यों के प्रभाव को मापा गया है, जबकि लाइफटाइम श्रेणी पूरे करियर के शोध योगदान को दर्शाती है।
इन शोधकर्ताओं ने चिकित्सा जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिकी, पर्यावरण विज्ञान, माइक्रोबायोलॉजी, फार्मेसी, इंजीनियरिंग, पदार्थ विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। पंजाब विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर मीनाक्षी गोयल ने इस उपलब्धि को बेहतर शोध, विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के बीच सहयोग और विश्वविद्यालय की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहचान का प्रमाण बताया है। यह सूची किसी विशेष पुरस्कार से हटकर, वैज्ञानिकों के शोध प्रभाव के व्यापक मूल्यांकन पर आधारित है, जो उनकी दीर्घकालिक अकादमिक उत्कृष्टता को प्रदर्शित करती है।



