लातूर । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल चाकुरकर का 90 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने लातूर में अपने घर देवघर में सुबह करीब साढ़े छह बजे आखिरी सांस ली। वे पिछले कुछ दिनों से बीमार थे। बढ़ती उम्र के साथ आई लंबी बीमारी की वजह से उनका घर पर ही इलाज चल रहा था। वे पिछले कई सालों से राजनीतिक जीवन से रिटायर हो चुके थे। शिवराज पाटिल चाकुरकर पूरी ज़िंदगी कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय रहे। लेकिन पिछले कई सालों से वे राजनीतिक जीवन से रिटायर हो चुके थे। उन्हें बहुत मेहनती और साफ सोच वाले राजनेता के तौर पर देखा जाता है। शिवराज पाटिल का निधन दुखद है। वे एक अनुभवी नेता थे, उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में विधायक, सांसद, केंद्रीय मंत्री, महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष और लोकसभा के अध्यक्ष के तौर पर काम किया। समाज की भलाई में योगदान देने की उनकी बहुत इच्छा थी। पिछले कुछ सालों में मेरी उनसे कई बार बातचीत हुई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी श्रद्धांजलि – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा, पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री और वरिष्ठ नेता शिवराजजी पाटिल चाकुरकर के निधन की खबर दुखद है। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं। उन्हें मेरी दिल से श्रद्धांजलि। लोकसभा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री के तौर पर काम करते हुए चाकुरकर ने अपनी प्रशासनिक क्षमता से देश में एक अलग पहचान बनाई।
लातूर ज़िले के चाकुर के रहने वाले थे शिवराज पाटिल चाकुरकर – शिवराज पाटिल चाकुरकर महाराष्ट्र के लातूर ज़िले के चाकुर के रहने वाले थे। उन्हें राजनीति में बहुत मेहनती और साफ़ छवि वाले नेता के तौर पर देखा जाता है। उस्मानिया यूनिवर्सिटी से साइंस में ग्रेजुएशन और मुंबई यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई करने के बाद, उन्होंने 1967-69 तक लातूर महानगरपालिका में काम करके राजनीति में कदम रखा। वे पहली बार 1980 में लातूर सीट से लोकसभा के लिए चुने गए और 1999 तक लगातार सात बार चुनाव जीतकर लोकसभा में एक असरदार नेता के तौर पर अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की के मंत्रिमंडल में डिफेंस, कॉमर्स, साइंस एंड टेक्नोलॉजी, एटॉमिक एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्पेस जैसे ज़रूरी विभागों की ज़िम्मेदारी संभाली।
1991 से 1996 तक वे देश के 10वें लोकसभा अध्यक्ष रहे। उन्होंने लोकसभा के आधुनिकीकरण, कंप्यूटराइज़ेशन, संसद की कार्यवाही का सीधा प्रसारण और नई लाइब्रेरी बिल्डिंग जैसी कोशिशों को बढ़ावा दिया। उन्होंने सोनिया गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस पार्टी में भी कई अहम ज़िम्मेदारियां निभाईं, जिसमें मैनिफेस्टो कमिटी का चेयरमैन बनना भी शामिल है। 2004 के चुनाव में वे हार गए। फिर भी सोनिया गांधी ने उन पर भरोसा किया और उन्हें गृह मंत्री का पद दिया। 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद सुरक्षा में हुई चूक की नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए उन्होंने 30 नवंबर 2008 को इस्तीफ़ा दे दिया था। इतना ही नहीं, उन्होंने देश और विदेश में संसदीय परिषद में भारत का असरदार तरीके से नेतृत्व किया। बाद में, उन्होंने पंजाब के गवर्नर के तौर पर भी बहुत सब्र से काम किया। उन्हें देश के सबसे अच्छे सांसद का अवॉर्ड शुरू करने का क्रेडिट भी दिया जाता है।



