HomeNationalसियासी फेरबदल: पश्चिम बंगाल में अकेले चुनाव मैदान में उतर सकती है...

सियासी फेरबदल: पश्चिम बंगाल में अकेले चुनाव मैदान में उतर सकती है कांग्रेस!

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है। कांग्रेस पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों में वाम मोर्चे से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ने पर गंभीरता से विचार कर रही है। पार्टी के भीतर इसे लेकर मंथन तेज हो गया है और संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस अब अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को फिर से मज़बूत करने की रणनीति पर आगे बढ़ सकती है। सूत्रों के अनुसार, पिछले चुनावों में वाम मोर्चे के साथ गठबंधन के बावजूद कांग्रेस को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। 2021 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और वाम मोर्चा दोनों ही खाता खोलने में नाकाम रहे थे, जिससे पार्टी के अंदर गठबंधन की उपयोगिता पर सवाल उठे।

कांग्रेस नेताओं का मानना है कि राज्य में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी लड़ाई के कारण तीसरे मोर्चे की राजनीति कमजोर हुई है। ऐसे में पार्टी अब जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत कर, अपने बलबूते जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है।पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि बंगाल में कांग्रेस की ऐतिहासिक भूमिका रही है और मतदाता आज भी एक वैकल्पिक राजनीतिक ताकत की तलाश में हैं। अकेले चुनाव लड़ने से पार्टी को अपनी नीतियों और विचारधारा को स्पष्ट रूप से जनता के सामने रखने का अवसर मिलेगा।हालांकि, इस मुद्दे पर अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।

आने वाले दिनों में कांग्रेस की रणनीति बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, पश्चिम बंगाल में तृणमूल की साथ गठबंधन में जाने से केरल में वाम मोर्चे के साथ भिड़ने में मुश्किल होगी क्या? इस पर विमर्श चल रहा है। पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे के साथ जाने पर लाभ हानि के गुणा भाग पर भी काम हो रहा है। केरल में वाम मोर्चे की अगुवाई वाली एलडीएफ और कांग्रेस की अगुवाई वाली यूडीएफ आमने सामने है। वाम दलों के साथ पश्चिम बंगाल चुनाव कांग्रेस ने 2016 में लड़ा था जिसमें कांग्रेस को 44 और वाम मोर्चा को 26 सीटें मिली थी।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments