नई दिल्ली। देवभूमि उत्तराखंड की दुर्गम पहाड़ियों के बीच चारधाम की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। भारतीय रेलवे के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का निर्माण कार्य अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल यह 125 किलोमीटर लंबी रेल लाइन न केवल श्रद्धालुओं के उबाऊ सड़क सफर को खत्म करेगी, बल्कि बुजुर्गों और बच्चों के लिए पहाड़ों की यात्रा को बेहद आरामदायक बना देगी। रेल मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए ब्लूप्रिंट के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य उत्तराखंड के दूरदराज के इलाकों को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ना और पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है।
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका इंजीनियरिंग कौशल है। 125 किलोमीटर लंबे इस मार्ग का लगभग 105 किलोमीटर हिस्सा 16 मुख्य सुरंगों (टनल) से होकर गुजरेगा। सुरक्षा के लिहाज से मुख्य सुरंगों के समानांतर 12 निकास सुरंगें और क्रॉस पैसेज भी बनाए गए हैं, जिन्हें मिलाकर सुरंगों की कुल लंबाई 213 किलोमीटर तक पहुँचती है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 160 किलोमीटर से अधिक की खुदाई का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है और अब जल्द ही इन सुरंगों के भीतर अत्याधुनिक ट्रैक बिछाने की प्रक्रिया शुरू होगी। इस रेल लाइन पर बिछाए जाने वाले ट्रैक मेट्रो रेल की तर्ज पर उच्च गुणवत्ता वाले होंगे, जो पहाड़ों के कठिन भूगोल में भी तेज और सुरक्षित सफर सुनिश्चित करेंगे।



