नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने से ठीक पहले ही जगदीप धनखड़ राजनीतिक दलों को बड़ी सीख दे गए। उनका कहना है कि सभी के चलने का रास्ता भले ही अलग हो, लेकिन मंजिल देश हित ही होता है। उन्होंने एक-दूसरे के खिलाफ अशोभनीय भाषा और व्यक्तिगत हमलों से परहेज करने की अपील करते हुए कहा कि टेलीविजन या अन्य मंचों पर असभ्य व्यवहार हमारी सभ्यता के मूल स्वरूप के विपरीत है। राज्यसभा के 268वें सत्र के अवसर पर सोमवार को उच्च सदन में सभापति ने कहा संवाद और विमर्श भारत की ऐतिहासिक शक्ति रही है, और यही हमारे संसद की कार्यप्रणाली का मार्गदर्शक होना चाहिए।
सोमवार को उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर त्यागपत्र दे दिया। खास बात है कि उन्होंने संसद के मॉनसून सत्र के पहले ही दिन इस्तीफा दे दिया। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन उच्च सदन की बैठक में सभापति ने कहा, राजनीति का सार टकराव नहीं, संवाद है। अलग-अलग राजनीतिक दल भले ही अलग रास्तों से चलें, लेकिन सभी का लक्ष्य देशहित ही होता है। भारत में कोई भी राष्ट्र के हितों का विरोध नहीं करता। धनखड़ ने कहा कि आंतरिक संघर्ष देश के शत्रुओं को बल देता है और हमारे बीच फूट डालने के लिए सामग्री उपलब्ध कराता है। उन्होंने राजनीतिक दलों से रचनात्मक राजनीति में भाग लेने का अनुरोध करते हुए विश्वास जताया कि सभी के सहयोग और सक्रिय सहभागिता से यह मानसून सत्र उत्पादक और सार्थक सिद्ध होगा।
हाल में उनकी दिल्ली एम्स में एंजियोप्लास्टी हुई थी और इस वर्ष मार्च में उन्हें कुछ दिनों के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ अवसरों पर उनकी हालत ठीक नहीं दिखी थी, लेकिन संसद सहित सार्वजनिक कार्यक्रमों में वह अक्सर ऊर्जावान ही दिखे। शायद यही कारण है धनखड़ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे पत्र में कहा, स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और चिकित्सीय सलाह का पालन करने के लिए, मैं संविधान के अनुच्छेद 67 (ए) के अनुसार, तत्काल प्रभाव से भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे रहा हूं। धनखड़ ने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति का पदभार संभाला था और उनका कार्यकाल 2027 तक था।



