उन्होंने टिप्पणी की कि यह विडंबना है कि पंजाब के किसान पराली जलाने की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं और देश का “अन्नदाता” होने के नाते देश का पेट भी भर रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार राज्य को उसके जायज बकाये का भुगतान करने से इंकार कर रही है।केंद्र सरकार की इस पुष्टि पर प्रतिक्रिया देते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि इन आंकड़ों ने उन आलोचकों को पूरी तरह शांत कर दिया है, जो लगातार पंजाब के किसानों को निशाना बनाते थे और उत्तर भारत के वायु प्रदूषण संकट के लिए राज्य को जिम्मेदार ठहराते थे। जिन्होंने पंजाब के खिलाफ बदनाम करने का अभियान चलाया और दावा किया कि पराली जलाना कभी खत्म नहीं होगा, उन्हें अब अपने शब्द वापस लेने चाहिए।
उन्होंने कहा, “सालों से हमारे किसानों को बदनाम किया जाता रहा और दिल्ली की बिगड़ती वायु गुणवत्ता के लिए अकेले पंजाब को जिम्मेदार ठहराया जाता था। अब केंद्र सरकार के अपने सैटेलाइट डेटा, जो संसद में औपचारिक रूप से प्रस्तुत किए गए हैं, ने सभी झूठे दावों को खारिज कर दिया है। 90 प्रतिशत से अधिक कमी की पुष्टि वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित है।”कृषि मंत्री ने कृषि मशीनीकरण के लिए राज्य सरकार के प्रयासों को उजागर करते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान राज्यभर के किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन (सी आर एम ) मशीनरी की खरीद पर 416 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई।
आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 600 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान के साथ, उन्होंने भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार पराली जलाने की समस्या का एक टिकाऊ और दीर्घकालिक समाधान प्रस्तुत करेगी।उन्होंने कहा, “पराली के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए 600 करोड़ रुपये की कार्ययोजना के साथ मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ऐसे संसाधनों में निवेश कर रही है, जो सुनिश्चित करेंगे कि किसानों को दोबारा पराली जलाने की आवश्यकता न पड़े।”
कृषि मंत्री ने ग्रामीण विकास फंड (आर डी एफ) के 8800 करोड़ रुपये के बकाया को तुरंत जारी करने की मांग दोहराते हुए कहा कि यह राशि कई खरीद सीजनों से रोकी जा रही है। उन्होंने कहा, “हम सुप्रीम कोर्ट तक गए हैं, हर दरवाजा खटखटाया है, लेकिन अब तक फंड जारी नहीं किए गए हैं।”पंजाब के किसानों के सहयोग और आधुनिक मशीनरी अपनाने की उनकी इच्छाशक्ति की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे देश के सच्चे अन्नदाता हैं। उन्होंने कहा कि उचित सहयोग मिलने पर किसान वह सब हासिल कर सकते हैं, जिसे कभी असंभव माना जाता था।



