चंडीगढ़। केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ देश का पहला झुग्गी-मुक्त शहर बन गया है। मंगलवार सुबह चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर की अंतिम बची झुग्गी बस्ती को ढहा दिया, जो सेक्टर 38 की शाहपुर कॉलोनी में थी। इस विध्वंस कार्य के लिए 8 टीमें बुलडोजरों के साथ तैनात की गईं। शांति सुनिश्चित करने के लिए करीब 500 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। किसी भी मेडिकल इमरजेंसी के लिए डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और एम्बुलेंस सहित चिकित्सा टीमें भी मौके पर तैयार रहीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, 4 एकड़ सरकारी जमीन पर फैली शाहपुर कॉलोनी की कीमत करीब 250 करोड़ रुपये आंकी गई। इसमें करीब 300 झोपड़ियां थीं, जहां करीब 1 हजार लोग रहते थे। चड़ीगढ़ प्रशासन ने कॉलोनी के बाहर पहले ही सार्वजनिक नोटिस लगा दिया था, जिसमें निवासियों को जगह खाली करने के लिए कहा गया। इंजीनियरिंग डिपोर्टमेंट को निर्देश दिए गए कि विध्वंस कार्य से एक दिन पहले बिजली और पानी के कनेक्शन काट दिए जाएं, ताकि कार्य सुचारु रूप से हो और किसी भी खतरे से बचा जा सके। झोपड़ियों को ढहाने के बाद प्रशासन ने भविष्य में अतिक्रमण रोकने के लिए खाली जमीन को तारबंद करने की योजना बनाई है।
बात दें कि चंडीगढ़ प्रशासन 2000 के दशक की शुरुआत से शहर को झुग्गी-मुक्त बनाने की दिशा में लगा है। वर्ष 2006 में प्रशासन ने चंडीगढ़ स्मॉल फ्लैट्स स्कीम के तहत पुनर्वास पहल शुरू की थी। इसके तहत शहर की 2,811 एकड़ खाली जमीन में से करीब 356 एकड़ को 25,728 फ्लैट्स के निर्माण के लिए आवंटित किया गया, जिसमें 18 अनधिकृत कॉलोनियों की 23,841 परिवारों को बसाने की योजना थी। इन परिवारों में करीब एक लाख से अधिक लोग शामिल हैं, उन्हें पुनर्वास के बाद मामूली मासिक किराए का भुगतान करना था। हालांकि, देरी और गैर-भुगतान के कारण काफी बकाया राशि जमा हो गई है।



