रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को न्यायपालिका से बड़ी राहत मिली है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने इस मामले से जुड़े दो अलग-अलग प्रकरणों में चैतन्य बघेल की जमानत याचिका मंजूर कर ली। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की एकल पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो व आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (एसीबी/ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज मामलों में सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।
गौरतलब है कि कोर्ट ने इस मामले में दलीलें सुनने के बाद 12 दिसंबर, 2025 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि चैतन्य बघेल की कथित भूमिका इस मामले के अन्य वरिष्ठ आरोपियों की तुलना में काफी कम पाई गई है। हाई कोर्ट ने समानता के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि जब मामले के मुख्य आरोपी और कथित सरगनाओं जैसे अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह और अन्य को सर्वोच्च न्यायालय से पहले ही जमानत मिल चुकी है, तो ऐसे में चैतन्य को हिरासत में रखना उचित नहीं होगा।
अदालत ने यह भी माना कि इस मामले की जांच मुख्य रूप से दस्तावेजी प्रकृति की है और आरोपी लंबे समय से जेल में बंद है। ईडी के मामले में टिप्पणी करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि केंद्रीय एजेंसी द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों में चैतन्य के नाम पर कोई प्रत्यक्ष दस्तावेज, बैंक खाता या संपत्ति का खुलासा नहीं हुआ है, जो अपराध की कमाई में उनकी सीधी संलिप्तता साबित कर सके। हालांकि उन पर सिंडिकेट के शीर्ष पर होने का आरोप लगाया गया था, लेकिन रिकॉर्ड पर ऐसा कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिला जो यह दर्शाए कि निविदा आवंटन, कमीशन दरों के निर्धारण या नकदी संग्रह जैसे निर्णयों पर उनका कोई नियंत्रण था।



