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लालू परिवार की बढ़ीं कानूनी मुश्किलें: लैंड फॉर जॉब केस में आरोप तय

नई दिल्ली । रेलवे में कथित जमीन के बदले नौकरी देने के मामले में राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की चार्जशीट पर सुनवाई करते हुए लालू यादव, तेजस्वी यादव, राबड़ी देवी, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती, हेमा यादव समेत कुल 40 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है। यह फैसला सीबीआई के विशेष जज विशाल गोगने की अदालत ने शुक्रवार को सुनाया।

इसके साथ ही अदालत ने इस मामले में कुल 103 आरोपियों में से 52 को बरी भी कर दिया है। अदालत के आदेश के बाद अब लालू परिवार और अन्य आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को छोड़कर अन्य सभी आरोपी अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव भी अदालत पहुंचे। अदालत ने मामले में विस्तृत सुनवाई के बाद यह स्पष्ट किया कि आरोप तय किए जाने का मतलब यह है कि अब साक्ष्यों के आधार पर ट्रायल आगे चलेगा।

यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव यूपीए सरकार के कार्यकाल में रेल मंत्री थे। जांच एजेंसियों का आरोप है कि वर्ष 2004 से 2009 के बीच रेलवे में ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियों के बदले उम्मीदवारों से या उनके परिवारजनों से लालू परिवार और उनके करीबियों के नाम पर जमीनें ली गईं। आरोप यह भी है कि ये जमीनें बाजार मूल्य से बेहद कम कीमत पर लिखवाई गईं या उपहार के रूप में ट्रांसफर कराई गईं। सीबीआई इस मामले में आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोपों की जांच कर रही है, जबकि मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच प्रवर्तन निदेशालय द्वारा अलग से की जा रही है।

सीबीआई का कहना है कि जिन अभ्यर्थियों को नौकरी दी गई, वे बिहार के अत्यंत गरीब तबके से थे और उनके शैक्षणिक दस्तावेज भी संदिग्ध पाए गए। जांच एजेंसी के अनुसार कई मामलों में फर्जी स्कूलों के प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुक्तियां की गईं। सीबीआई ने आरोपपत्र में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी लगाई हैं। अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद अब इस बहुचर्चित मामले में गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर सुनवाई होगी। राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से अहम माने जा रहे इस फैसले के बाद आने वाले दिनों में लालू परिवार की कानूनी लड़ाई और तेज होने की संभावना है।

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