देहरादून। देश के मौसम में इन दिनों विरोधाभासी स्थितियां देखने को मिल रही हैं। एक तरफ जहां पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय दो नए पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) के कारण पहाड़ों पर बर्फबारी का दौर शुरू होने वाला है, वहीं मध्य भारत के मैदानी इलाकों में पारा तेजी से चढ़ने लगा है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, 13 से 16 फरवरी के बीच सक्रिय हुए इन विक्षोभों का असर अगले दो दिनों तक हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश और बर्फबारी के रूप में दिखाई देगा।
मैदानी राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश और राजस्थान में 16 फरवरी से मौसम का मिजाज बदलने की संभावना है। राजस्थान के जयपुर और बीकानेर संभाग के जिलों के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश की आशंका जताई गई है। इस नए मौसमी तंत्र का सर्वाधिक प्रभाव 17 और 18 फरवरी को देखने को मिलेगा। इसके विपरीत, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में गर्मी ने दस्तक दे दी है। भोपाल और इंदौर समेत मध्य प्रदेश के 17 शहरों में दिन का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, हालांकि पचमढ़ी और खजुराहो जैसे इलाकों में रातें अब भी ठंडी बनी हुई हैं। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पारा 32.5 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया है, जो सामान्य से अधिक है। पहाड़ी राज्यों में स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
उत्तराखंड के पांच जिलों—उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में 16 फरवरी को बर्फबारी का अलर्ट है। यहां मुनस्यारी में तापमान गिरकर -28 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि बद्रीनाथ और गंगोत्री में भी पारा -20 डिग्री से नीचे बना हुआ है। हिमाचल प्रदेश के मंडी में दिन के तापमान में करीब 7 डिग्री का असामान्य उछाल देखा गया, लेकिन 16 फरवरी से लाहौल-स्पीति और किन्नौर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में फिर से बर्फ की सफेद चादर बिछने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, 16 फरवरी को अरुणाचल प्रदेश में आंधी-तूफान के साथ बारिश की संभावना जताई गई है, जिससे पूर्वोत्तर भारत के तापमान में भी गिरावट आ सकती है।



