Health News : आधुनिक विज्ञान और आयुर्वेद दोनों ही सुबह की सैर को संजीवनी की तरह मानते हैं। आज के समय में लगभग हर घर में हाई ब्लड प्रेशर या शुगर से जूझ रहे मरीज मिल जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित सैर न केवल इन बीमारियों को नियंत्रित रखने में सहायक होती है, बल्कि कई मामलों में यह दवा की तरह असर दिखाती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि सुबह के समय शरीर विशेष बायोकेमिकल प्रक्रियाओं से गुजरता है। इसी दौरान जब शरीर को ताजी ठंडी हवा मिलती है, तो प्राकृतिक रूप से इंसुलिन का निर्माण बढ़ जाता है। शुगर के मरीज जब तेज कदमों से चलते हैं, तो उनकी मांसपेशियां रक्त में मौजूद ग्लूकोज को खींचकर ऊर्जा में बदल देती हैं। यह क्रिया शरीर में दवा की तरह काम करती है और रक्त संचार को भी तेज करती है।
वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार सुबह की सैर धमनियों में रक्त प्रवाह बढ़ाती है और शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड के स्तर को बढ़ाने में मदद करती है। नाइट्रिक ऑक्साइड धमनियों को रिलैक्स करता है, जिससे हाई बीपी के मरीजों में धमनियों पर पड़ने वाला दबाव कम होता है और रक्तचाप नियंत्रित रहता है। इसी कारण हाई बीपी से जूझ रहे लोगों के लिए सुबह की सैर एक आसान और प्रभावी उपाय माना जाता है। कई शोध यह भी बताते हैं कि लगातार तीन महीनों तक रोजाना 30 मिनट की सैर करने से शुगर लेवल में उल्लेखनीय कमी देखी जा सकती है। सैर दिल को भी मजबूत बनाती है और शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाती है। गुड कोलेस्ट्रॉल हृदय रोगों और उच्च रक्तचाप दोनों के लिए फायदेमंद होता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा कम हो जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक सुबह की सैर का असली लाभ तभी मिलता है, जब इसे ब्रह्म मुहूर्त में किया जाए। उस समय वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होती है और प्रदूषण का स्तर सबसे कम रहता है, जिससे शरीर को अधिकतम लाभ मिलता है। हालांकि सैर का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सैर करते समय कदम लंबे और गति तेज होनी चाहिए, लेकिन इतना भी नहीं कि व्यक्ति हांफने लगे। तेज चलने से रक्त शरीर के हर हिस्से तक बेहतर तरीके से पहुंचता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोजाना कम से कम एक घंटे की सैर करनी चाहिए। नए लोग शुरुआत में आधे घंटे से शुरू कर सकते हैं और धीरे-धीरे समय तथा गति दोनों में बढ़ोतरी कर सकते हैं। यह न केवल ऊर्जा बढ़ाती है बल्कि समग्र स्वास्थ्य को भी मजबूती देती है।



