नई दिल्ली। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू का यह बयान संसद के शीतकालीन सत्र (2025) के समापन के बाद विपक्ष की भूमिका और सरकार की उपलब्धियों पर केंद्रित है। केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने गहरा खेद व्यक्त किया कि मोदी सरकार प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे पर पूरे दिन चर्चा करने को तैयार थी, लेकिन विपक्ष (मुख्यतः कांग्रेस) ने इस मुददों को प्राथमिकता नहीं दी। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने अन्य दलों को उकसाकर सदन में हंगामा किया और वेल में आकर व्यवधान पैदा किया, जिससे इस महत्वपूर्ण विषय पर सार्थक संवाद नहीं हो सका।
केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने इस सत्र को ऐतिहासिक बताया क्योंकि पहली बार चुनाव आयोग और चुनावी सुधारों पर अलग से विस्तृत चर्चा हुई। उनका मानना है कि: इस बहस के बाद चुनाव प्रक्रिया को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम दूर हो गए हैं। चुनाव आयोग पर सवाल उठाने वाले तत्व बेनकाब हो गए हैं। मोदी सरकार ने इस सत्र को अत्यंत उत्पादक बताया है। केंद्रीय मंत्री रिजिजू के अनुसार देशभक्ति की भावना को सुदृढ़ करने के लिए इस पर विशेष चर्चा की गई। रिजिजू ने कहा कि पुराने सिस्टम में भ्रष्टाचार था, जिसे ठीक करने के लिए विकसित भारत: जी राम जी बिल लाया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस बिल का विरोध करके विपक्ष ने साबित कर दिया है कि वह मजदूरों के हित में नहीं है। किरेन रिजिजू के अनुसार, जहाँ सरकार प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के विजन को विधायी रूप देने में सफल रही, वहीं विपक्ष ने केवल व्यवधान पैदा करने और जनता को भ्रमित करने का काम किया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, लोगों ने मनरेगा को लूट और भ्रष्टाचार का जरिया बना लिया था। इसे ठीक करने के लिए विकसित भारत : जी राम जी बिल लाया गया। यह बिल ग्रामीण भारत में क्रांति लाएगा। इसके बाद भी विपक्ष लगातार इसका विरोध करता रहा। इससे पता चलता है कि विपक्ष मजदूर विरोधी है।



