नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण), जिसे वीबी- ‘जी राम जी’ बिल 2025 कहा जा रहा है, को अपनी मंजूरी दे दी है। इस नए अधिनियम के लागू होने के साथ ही ग्रामीण परिवारों के लिए वैधानिक मजदूरी रोजगार गारंटी को बढ़ाकर प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिन कर दिया गया है। अब तक यह सीमा 100 दिनों की थी।सरकार का कहना है कि यह नया कानून वर्ष 2005 से लागू मनरेगा अधिनियम की जगह लेगा। पिछले दो दशकों में ग्रामीण भारत की आर्थिक स्थिति, डिजिटल ढांचे, कनेक्टिविटी और आवश्यकताओं में व्यापक बदलाव आए हैं। ऐसे में केवल पुराने कानून में संशोधन करने के बजाय एक नए और आधुनिक वैधानिक ढांचे की जरूरत महसूस की गई, जिसे ‘विकसित भारत–जी राम जी’ बिल के रूप में लागू किया गया है।
इस अधिनियम का उद्देश्य सिर्फ अस्थायी रोजगार उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ आजीविका, मजबूत बुनियादी ढांचे और दीर्घकालिक विकास को बढ़ावा देना है। सरकार के अनुसार, यह कानून सशक्तिकरण, समावेशी विकास, विभिन्न विकास योजनाओं के बेहतर समन्वय और संसाधनों के व्यापक वितरण पर केंद्रित है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। बताया जा रहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरी रोजगार के दिन बढ़ने से लाखों परिवारों की आय में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। साथ ही, यह कदम पलायन को रोकने और गांवों में ही रोजगार के अवसर पैदा करने में मददगार माना जा रहा है। इस प्रकार राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद वीबी- ‘जी राम जी’ बिल 2025 को ग्रामीण भारत के लिए एक नई शुरुआत और मजदूरों के लिए राहत वाला फैसला कहा जा रहा है।



