HomeHaryanaकुरुक्षेत्र की पावन धरा पर आज होगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आगमन

कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर आज होगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आगमन

चंडीगढ़ — हरियाणा सरकार द्वारा श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहादत दिवस पर आज ज्योतिसर (कुरुक्षेत्र) में  राज्यस्तरीय समागम आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी कुरुक्षेत्र पहुंचकर गुरु साहिब का आर्शीवाद प्राप्त करेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी सहित अन्य मंत्रीगण व गणमान्य अतिथि उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा, प्रधानमंत्री ज्योतिसर स्थित महाभारत अनुभव केंद्र का लोकार्पण करेंगे और साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान पवित्र ब्रह्मसरोवर पर महाआरती में भी भाग लेंगे।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को समागम कार्यक्रम स्थल का दौरा किया और मुख्य स्थल और मंच, संगत स्थल, सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग और आगंतुकों की सुविधाओं का जायज़ा लिया। इसके अलावा, उन्होंने प्रदर्शनी स्थल समेत सभी महत्वपूर्ण जगहों पर चल रही तैयारियों की स्थिति देखी और अधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी तरह दुरुस्त होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रबंधन, रूट प्लान, बैठने की व्यवस्था और तकनीकी तैयारियों में किसी भी प्रकार की कमी न रहे। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी आपसी समन्वय से काम करें ताकि समागम में आने वाले लोगों को किसी तरह की असुविधा न हो।

 नायब सिंह सैनी ने ब्रह्मसरोवर स्थित पुरुषोत्तम बाग पहुंचकर भी कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया और चल रही तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को सुरक्षा व्यवस्था सहित कार्यक्रम के विभिन्न पहलुओं पर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने आरती स्थल समेत अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर जाकर तैयारियों का बारीकी से आकलन किया।निरीक्षण के उपरांत, मुख्यमंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के तहत विभिन्न देशों द्वारा लगाई गई स्टॉल्स का भी अवलोकन किया। स्टॉल्स पर पहुंचने पर, विदेशी व्यापारियों और मेहमानों ने मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी का गर्मजोशी से ‘नमस्ते’ कहकर अभिवादन किया।

गुरु जी का अनुपम त्याग : सम्पूर्ण मानवता का कल्याण – धर्म की रक्षा के लिए श्री गुरु तेग बहादुर जी ने औरंगज़ेब के अत्याचारों के विरुद्ध दृढ़ता से खड़े होकर अपना शीश न्यौछावर किया। भाई दयाला जी, भाई सती दास जी और भाई मती दास जी जैसे उनके श्रद्धालुओं ने भी अद्वितीय बलिदान दिए। कुरुक्षेत्र में हो रहा यह समागम इसलिए भी खास है कि इस पावन भूमि पर आठ गुरु साहिबानों ने अपने पावन चरण रखे। प्रदेश में लगभग 28 ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब गुरुओं की स्मृतियों को संजोए हुए हैं। 1 नवंबर, 2025 से प्रदेशभर में श्री गुरु तेग बहादुर जी को समर्पित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं और प्रदेश के चारों कोनों से चार यात्राओं का भी आयोजन किया गया और गुरुओं की शिक्षाओं को जन—जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रमों की इसी कड़ी में आज कुरुक्षेत्र में भव्य समागम का आयोजन किया गया है।

ज्योतिसर अनुभव केंद्र का भी करेंगे लोकार्पण – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पवित्र ज्योतिसर में स्थापित अनुभव केंद्र का भी अवलोकन करेंगे। इसके अलावा, यहां भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य शंख पांचजन्य का भी लोकार्पण करेंगे। यह अवसर हरियाणा की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान करेगी।उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की ‘स्वदेश दर्शन’ योजना के अंतर्गत अनुभव केंद्र को विकसित किया गया है। यह केंद्र महाभारत के थीम पर आधारित एक अनूठा अनुभव प्रदान करता है। लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए इस भव्य परिसर में महाभारत की कथा, दर्शन, इतिहास और विज्ञान को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से जीवंत किया गया है।इस परिसर में भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य शंख पांचजन्य के सम्मान में पांचजन्य स्मारक का निर्माण किया गया है, जो धर्म और सत्य की विजय का प्रतीक है। यह विशाल शंख लगभग 5 से 5.5 टन वजनी और 4 से 5 मीटर ऊंचा है।

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान पवित्र ब्रह्मसरोवर पर महाआरती में भी प्रधानमंत्री लेंगे भाग – कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर भव्य रूप से आयोजित हो रहे अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी पवित्र ब्रह्मसरोवर पर होने वाली महाआरती में भी शामिल होंगे। गीता महोत्सव, जो भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए उपदेश ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ के ज्ञान का वैश्विक उत्सव है, हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। इस महोत्सव में देश-विदेश से आए विद्वान, कलाकार और संस्कृत एवं अध्यात्म के साधक एकत्र होकर गीता के ज्ञान और कर्म के संदेश को सांझा करते हैं। पवित्र ब्रह्मसरोवर के तट पर दीपों की लौ, वेद मंत्रों की गूंज और आस्था की उमंग के बीच होने वाली महाआरती भारत की आध्यात्मिक विरासत और कुरुक्षेत्र की वैश्विक पहचान को और अधिक गौरवान्वित करेगी।

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