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पंजाब द्वारा भारत की आयात निर्भरता कम करने के लिए पोटाश के खोज कार्यों में तेज़ी

चंडीगढ़ : पंजाब में धरती के नीचे पोटाश की खोज संबंधी कार्यों में तेज़ी लाने और भारत की पोटाश आयात पर भारी निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से पंजाब सरकार ने कृषि के लिए लाभदायक घरेलू खनिज स्रोतों को मज़बूत करने के प्रयास तेज़ कर दिए हैं।इस श्रृंखला के तहत पंजाब के खनन एवं भू-विज्ञान मंत्री बरिंदर कुमार गोयल की अध्यक्षता में पंजाब सिविल सचिवालय में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें पंजाब में पोटाश भंडार वाले मुख्य संभावित क्षेत्रों में खोज के लिए समय-सीमाएं निर्धारित करने के साथ-साथ इस संबंध में चल रहे कार्यों की प्रगति का जायज़ा लिया गया और भविष्य की प्राथमिकताएं तय की गईं।

बैठक में भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (जी.एस.आई.) के डिप्टी डायरेक्टर जनरल (पंजाब, हिमाचल और हरियाणा) मैडम गुप्ता, डायरेक्टर सुश्री मिश्रा और  अपराजिता भट्टाचार्जी तथा खनन एवं भू-विज्ञान विभाग पंजाब से मुख्य इंजीनियर हरदीप सिंह मैंदीरत्ता और सहायक भू-वैज्ञानिक पारस महाजन शामिल हुए।बैठक में फील्ड सीजऩ 2025-26 के दौरान पूर्ण हुए खोज ब्लॉकों की स्थिति और चल रही ड्रिलिंग गतिविधियों की समीक्षा करने के साथ-साथ फील्ड सीजऩ 2026-27 के लिए प्रस्तावित खोज और प्रारंभिक खोज कार्यक्रमों का खाका तैयार किया गया। बैठक के दौरान विशेष रूप से पोटाश की बड़ी संभावना के रूप में पहचाने गए फाजिल्का और श्री मुक्तसर साहिब ज़िलों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जहां पोटाश की बड़ी संभावनाओं की पहचान की गई है।

कैबिनेट मंत्री को जानकारी देते हुए जी.एस.आई. के प्रतिनिधियों ने बताया कि कबरवाला ब्लॉक और शेरगढ़-दलमीरखेड़ा ब्लॉक में जी-4 चरण की खोज पूरी हो चुकी है और इस संबंध में भू-वैज्ञानिक मेमोरेंडम राज्य सरकार को सौंपे जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि राज्य की सहमति के बाद शेरगढ़-शेरावाला-रामसरा-दलमीरखेड़ा का संयुक्त ब्लॉक खनन मंत्रालय द्वारा छठे चरण में कम्पोजिट लाइसेंस की नीलामी के लिए रखा गया है, जिसके परिणामों की अभी प्रतीक्षा है। उन्होंने यह भी बताया कि राजपुरा-राजावाली ब्लॉक और गिदड़ांवाली-अज़ीमगढ़ ब्लॉक में छह स्थानों पर ड्रिलिंग चल रही है, जिनमें से पांच स्थानों पर काम पूरा हो गया है और रासायनिक विश्लेषण के बाद अंतिम रिपोर्टें अप्रैल तक आने की उम्मीद है।

आगामी फील्ड सीजऩ 2026-27 के लिए जी.एस.आई. ने फाजिल्का ज़िले के केरा-खेड़ा ब्लॉक और सईदवाला ब्लॉक में प्रस्तावित खोज सर्वेक्षण और कंधवाला-रामसरा ब्लॉक में प्रारंभिक खोजों का प्रस्ताव रखा है, जिसमें पंद्रह ड्रिलिंग साइटें शामिल हैं।पूरे बेसिन को कवर करने के बारे में जी.एस.आई. अधिकारियों ने बताया कि पंजाब के पूरे खनिज भंडार का भू-भौतिक तरीकों से सर्वेक्षण किया जा रहा है और विस्तृत खोज के लिए लगभग पचास वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र की पहले ही पहचान की गई है। इस संबंध में मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड द्वारा मंत्रालय को प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया जाएगा।

इन निरंतर और वैज्ञानिक प्रयासों की सराहना करते हुए बरिंदर कुमार गोयल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि फील्ड सीजऩ 2025-26 के दौरान चल रही ड्रिलिंग और मैपिंग के कार्यों में तेज़ी लाई जाए और वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित ब्लॉकों को समय पर पूरा किया जाए। उन्होंने खनन एवं भू-विज्ञान विभाग पंजाब और जी.एस.आई. के बीच मासिक समीक्षा बैठकें करने के निर्देश भी दिए ताकि खनन के लिए भविष्य की संभावनाओं के बारे में अध्ययनों की योजना तैयार करने के साथ-साथ अन्य ब्लॉकों की निकट निगरानी और उन्हें समय पर सौंपना सुनिश्चित बनाया जा सके।

कैबिनेट मंत्री ने बड़े जनहित का ज़िक्र करते हुए कहा, “पोटाश कृषि के लिए एक महत्वपूर्ण खनिज है और भारत अपनी आवश्यकता का लगभग 99 प्रतिशत पोटाश आयात करता है। पंजाब में पोटाश की खोज और भविष्य में उत्पादन संबंधी सफलता का सीधा लाभ हमारे किसानों को होगा, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को मज़बूती मिलेगी और राज्य तथा देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।’’ उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान की अगुवाई वाली पंजाब सरकार वैज्ञानिक ढंग से किए हर प्रयास का समर्थन करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है ताकि देश को इस महत्वपूर्ण खनिज में आत्मनिर्भरता की ओर ले जाया जा सके।

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