उन्होंने जिला-वार विवरण साझा करते हुए बताया कि अमृतसर में 5, बरनाला 1, बठिंडा 9, फतेहगढ़ साहिब 4, फिरोजपुर 4, फाजिल्का 18, फरीदकोट 3, गुरदासपुर 8, होशियारपुर 1, जालंधर 2, लुधियाना 3, कपूरथला 5, मानसा 8, मोगा 12, मुक्तसर साहिब 5, पटियाला 4, पठानकोट 2, रोपड़ 1, संगरूर 1, मोहाली 4, शहीद भगत सिंह नगर 5 और तरनतारन में 6 बाल विवाह के मामले रोके गए हैं।कैबिनेट मंत्री ने कहा कि बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना मान सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ सरकार पूरी सख्ती के साथ-साथ संवेदनशीलता के साथ भी कार्रवाई कर रही है।
उन्होंने आगे बताया कि बाल विवाह रोकने की प्रक्रिया को और मजबूत करने के लिए पंजाब सरकार द्वारा पूरे राज्य में 2076 बाल विवाह निवारण अधिकारी (सीएमपीओज़) नियुक्त किए गए हैं, जिनमें सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग के सीडीपीओज़ और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के प्रिंसिपल शामिल हैं।इस संदर्भ में डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि बाल विवाह केवल कानूनी उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह बच्चों के सपनों, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े भविष्य पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि हर रोका गया बाल विवाह एक बच्ची को अपनी पढ़ाई पूरी करने, अपनी पहचान बनाने और आत्म-निर्भर जीवन की ओर बढ़ने का अवसर देता है।



