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पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया द्वारा राज्य के सीमावर्ती गांवों को नीति आयोग के कार्यक्रमों में शामिल करने की वकालत

चंडीगढ़: पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने औपचारिक रूप से राज्य के सीमावर्ती ब्लॉकों को नीति आयोग के ‘एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स’ और ‘एस्पिरेशनल ब्लॉकस’ कार्यक्रमों के अंतर्गत शामिल करने का सुझाव दिया। उन्होंने यह प्रस्ताव ‘बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट’ कार्यक्रम के बंद होने के मद्देनजर एक रणनीतिक कदम के रूप में पेश किया। राज्यपाल ने जोर देकर कहा कि इन ब्लॉकों को एक मजबूत ढांचे की आवश्यकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे देश की विकास यात्रा में पीछे न रह जाएं।

नीति आयोग के कार्यक्रमों के तहत जिलों और ब्लॉकों की उत्कृष्ट उपलब्धियों को मान्यता देने के लिए आयोजित ‘संपूर्णता अभियान सम्मान समारोह’ की अध्यक्षता करते हुए पंजाब के राज्यपाल ने कहा कि सरकार इन सीमावर्ती क्षेत्रों को ‘एस्पिरेशनल’ फ्रेमवर्क में शामिल करके, पुराने फंडिंग ढांचे के कारण उत्पन्न हुए खालीपन को भर सकती है। राज्यपाल ने समन्वित शासन की प्रशंसा की जिसने पंजाब में विकास को एक जन आंदोलन में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम मामूली प्रगति की बजाय लक्ष्य-आधारित परिवर्तन और विभिन्न योजनाओं की बजाय समन्वित कार्रवाई की ओर एक बड़ा कदम हैं। उन्होंने कहा कि वास्तविक विकास सबसे आगे चलने वाले की तरक्की से नहीं, बल्कि सबसे कमजोर वर्ग के उत्थान से मापा जाता है।

इस अवसर पर अपने मुख्य भाषण में भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव एवं नीति आयोग में इन कार्यक्रमों के मिशन डायरेक्टर रोहित कुमार ने बताया कि इस कार्यक्रम की सफलता तीन ‘सी’ पर टिकी हुई है: कन्वर्जेंस (समन्वय), कोलैबोरेशन (सहयोग) और कॉम्पिटिशन (प्रतिस्पर्धा)। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आकांक्षी जिलों और ब्लॉकों को प्रेरणादायक मॉडलों में बदलना है। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि थोड़े समय में ही देश भर के कई जिलों और ब्लॉकों ने न केवल राष्ट्रीय और राज्य के औसत आंकड़ों को पीछे छोड़ा है, बल्कि नए मील के पत्थर भी स्थापित किए हैं। उन्होंने इस सफलता का श्रेय सामूहिक टीम वर्क को दिया और भरोसा दिलाया कि वे नीति आयोग की बैठक में सीमावर्ती गांवों को कार्यक्रम में शामिल करने के राज्य के प्रस्ताव को पेश करेंगे।

अतिरिक्त मुख्य सचिव (योजना) जसप्रीत तलवार ने अपने स्वागत भाषण में पंजाब के इस कार्यक्रम में भागीदारी के बारे में बताते हुए कहा कि इस कार्यक्रम में दो जिले, फिरोजपुर और मोगा, तथा सात जिलों के दस ब्लॉक शामिल हैं। उन्होंने बताया कि फिरोजपुर और मोगा के बेहतर प्रदर्शन के कारण वे प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन अनुदान के योग्य बन गए हैं। उन्होंने नीति आयोग से अपील की कि राज्य के सीमावर्ती ब्लॉकों को भी इस कार्यक्रम के अंतर्गत लाया जाए। समारोह के दौरान मौजूदा और पूर्व जिला मजिस्ट्रेटों को उनकी अगुवाई के लिए सम्मानित किया गया। मौजूदा अधिकारियों में से डिप्टी कमिश्नर फिरोजपुर दीपशिखा शर्मा और डिप्टी कमिश्नर जालंधर हिमांशु अग्रवाल को ‘कॉपर मेडल’ प्राप्त हुए; जबकि डिप्टी कमिश्नर मोगा सागर सेतिया और डिप्टी कमिश्नर कपूरथला अमित कुमार पंचाल को ‘ब्रॉन्ज मेडल’ से सम्मानित किया गया।

पूर्व डिप्टी कमिश्नरों में कुलवंत सिंह (मोगा), विशेष सारंगल (मोगा) और राजेश धीमान (फिरोजपुर) को भी उनके योगदान के लिए प्रमाणपत्रों और पुरस्कारों से मान्यता दी गई।इस अवसर पर अन्य लोगों के अलावा अतिरिक्त मुख्य सचिव डी.के. तिवारी, अतिरिक्त मुख्य सचिव तेजवीर सिंह, प्रधान सचिव राहुल भंडारी, राज्यपाल पंजाब के प्रधान सचिव वी.पी. सिंह, प्रबंधकीय सचिव गुरकिरत कृपाल सिंह, वरुण रूजम, घनश्याम थोरी एवं अरशदीप सिंह थिंद, डायरेक्टर पंचायती राज (भारत सरकार) विपुल उज्जवल, डिप्टी कमिश्नर संगरूर राहुल चाबा और डी.सी. अमृतसर दलविंदरजीत सिंह भी मौजूद थे।

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