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 पंजाब ने नेशनल अचीवमेंट सर्वे में शीर्ष स्थान बरकरार रखा: हरजोत सिंह बैंस

चंडीगढ़ : पंजाब सरकार द्वारा वर्ष 2025 में की गई महत्वपूर्ण पहलों के चलते राज्य की सरकारी स्कूल शिक्षा प्रणाली को एक नया स्वरूप मिला है। शिक्षा व्यवस्था में आए इस परिवर्तन ने ठोस, सकारात्मक और परिवर्तनकारी परिणाम देते हुए शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नए मानक स्थापित किए हैं। मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में ऐसे कक्षा-कक्ष विकसित किए जा रहे हैं, जहाँ आत्मविश्वास और नवाचार के माध्यम से प्रदेश के युवाओं के भविष्य को नया आकार दिया जा रहा है।

स्कूल शिक्षा विभाग की इस वर्ष की प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री सरदार हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को सशक्त बनाना है, जो उन्हें भविष्य के लिए तैयार करने वाली समग्र शिक्षा देने के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “हमारी पहलों ने शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण सकारात्मक बदलाव लाए हैं। नेशनल अचीवमेंट सर्वे (एन.ए.एस.) में शीर्ष रैंक को बनाए रखना यह सिद्ध करता है कि जमीनी स्तर पर बेहतर शिक्षा प्रदान करने के परिणाम अब हमारा मानक बन चुके हैं।”

इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रमाण राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणाम हैं, जिन्होंने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सरकारी स्कूलों के रिकॉर्ड 265 विद्यार्थियों ने जे.ई.ई. मेन्स परीक्षा, 45 विद्यार्थियों ने जे.ई.ई. एडवांस्ड परीक्षा तथा 847 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की। इन नतीजों से यह स्पष्ट होता है कि अब सरकारी स्कूल देश के शीर्ष संस्थानों और पदों तक पहुँचने के लिए विद्यार्थियों को सशक्त मंच प्रदान कर रहे हैं।पंजाब ने सत्र 2025-26 में 11वीं कक्षा में ‘उद्यमिता’ को मुख्य विषय के रूप में लागू कर राष्ट्रीय स्तर पर एक विशिष्ट पहचान बनाई है, जिससे विद्यार्थियों में उद्यमशीलता की भावना विकसित हुई है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि इसके परिणामस्वरूप स्कूलों में विद्यार्थियों के नेतृत्व में छोटे-छोटे उद्यम उभरने लगे हैं और नौकरी खोजने की बजाय नौकरी सृजन की मानसिकता विकसित हो रही है।

विद्यार्थियों की भलाई के लिए एक निर्णायक कदम उठाते हुए सरदार बैंस ने बताया कि सभी सरकारी स्कूलों में 11वीं और 12वीं कक्षा के लिए एक अग्रणी नशा-निवारण पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। यह पाठ्यक्रम 8 लाख से अधिक विद्यार्थियों को पीयर लीडरशिप और मानसिक मजबूती प्रदान करता है, उन्हें नशीले पदार्थों से दूर रखता है और स्कूलों को स्वास्थ्य एवं कल्याण के केंद्रों में बदलता है।उन्होंने कहा कि स्कूल शिक्षा प्रणाली में बड़े स्तर पर विश्वस्तरीय शिक्षण पद्धतियों को शामिल किया गया है। इसके तहत 234 प्रिंसिपलों और शिक्षा प्रशासकों को सिंगापुर में प्रशिक्षण दिलाया गया, 216 प्राथमिक कैडर शिक्षकों को फिनलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ तुर्कू से प्रशिक्षण दिया गया तथा 199 मुख्य अध्यापकों ने आई.आई.एम. अहमदाबाद से प्रशिक्षण प्राप्त किया है।

राज्य सरकार द्वारा शुरू किया गया “स्कूल मेंटरशिप प्रोग्राम” विद्यार्थियों को वरिष्ठ अधिकारियों से जोड़ता है, जिससे उन्हें जीवन में ऊँचे लक्ष्य हासिल करने और रुचि के अनुसार करियर चुनने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन मिलता है।शिक्षा मंत्री ने कहा कि सभी विद्यार्थियों के लिए समान करियर योजना सुनिश्चित करने हेतु पंजाब सरकार ने हाल ही में अपने पब्लिक स्कूल सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित करियर गाइडेंस को शामिल करने की दिशा में अपनी तरह का पहला प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस पहल के पायलट चरण के तहत सरकारी तथा पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (पी.एस.ई.बी.) से संबद्ध स्कूलों में 25 ए.आई. आधारित करियर गाइडेंस लैब्स का उद्घाटन किया गया है।

उन्होंने बताया कि “इंग्लिश एज” कार्यक्रम अब एक संस्थागत रूप ले चुका है, जिसके माध्यम से 500 स्कूलों में 9वीं से 12वीं कक्षा के 3 लाख विद्यार्थियों को अंग्रेज़ी बोलने में आत्मविश्वास मिला है, जिससे उनके लिए वैश्विक अवसरों के द्वार खुले हैं।सरदार हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि 118 सरकारी स्कूलों को ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ के रूप में उन्नत किया जा रहा है। स्कूलों में स्टाफ को और मजबूत करते हुए 12,316 योग्य कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित किया गया है, 13,765 नए अध्यापकों की भर्ती की गई है तथा सरकारी स्कूलों के लिए 1,908 कैंपस मैनेजर और 1,316 सुरक्षा गार्ड नियुक्त किए गए हैं।

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