नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार को जाति जनगणना के सवाल पर घेरने का प्रयास किया। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट कर कहा कि सरकार के पास इसको लेकर न कोई ठोस रूपरेखा है, न समयबद्ध योजना, न संसद में चर्चा, और न ही जनता से संवाद। उन्होंने एक्स पर अपने पोस्ट के साथ संसद में उनके द्वारा उठाए गए सवालों और सरकार के जवाब की फोटो पोस्ट करते हुए कहा कि संसद में मैंने सरकार से जाति जनगणना पर सवाल पूछा कि उनका जवाब चौंकाने वाला है। न ठोस रूपरेखा, न समयबद्ध योजना, न संसद में चर्चा, और न ही जनता से संवाद। दूसरे राज्यों की सफल जाति जनगणनाओं की रणनीति से सीखने की कोई इच्छा भी नहीं। मोदी सरकार की यह जाति जनगणना देश के बहुजनों के साथ खुला विश्वासघात है।
जाति जनगणना को लेकर राहुल गांधी ने सवाल किए थे कि दशकीय जनगणना की तैयारी के लिए प्रमुख प्रक्रियात्मक कदमों का ब्यौरा और संभावित समयसीमा क्या है, जिसमें प्रश्नों की तैयारी, कार्यक्रम निर्धारण करना शामिल है। क्या सरकार का जनगणना के सवालों का प्रारूप प्रकाशित करने और इन सवालों पर जनता या जनप्रतिनिधियों से इनपुट लेने का कोई प्रस्ताव है? क्या सरकार अलग-अलग राज्यों में किए गए जाति सर्वेक्षण समेत पिछले अनुभवों पर विचार कर रही है और यदि हां, तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है? गृह मंंत्रालय की तरफ से गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने जवाब दिया कि जनगणना 2027 दो चरणों में की जाएगी, अर्थात् चरण 1 – मकान सूचीकरण तथा मकानों की गणना, जो अप्रैल से सितंबर 2026 में 30 दिनों की अवधि में राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों की सुविधा के अनुसार की जाएगी, इसके बाद चरण 2 – जनसंख्या गणना होगी।



