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राज्यसभा चुनाव:हरियाणा से भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध विजयी

चंडीगढ़- हरियाणा से राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुआ चुनाव किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं रहा। सोमवार को हुए मतदान के बाद साढ़े पांच घंटे तक चले हाईवोल्टेज ड्रामे और लंबी खींचतान के बाद देर रात नतीजे घोषित किए गए। इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध ने जीत दर्ज की है, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को शिकस्त का सामना करना पड़ा। मतों के गणित की बात करें तो संजय भाटिया को 31, कर्मवीर बौद्ध को 28 और सतीश नांदल को 27 वोट मिले। इस तरह कांग्रेस प्रत्याशी ने मात्र एक वोट के अंतर से बेहद रोमांचक जीत हासिल की।

चुनाव प्रक्रिया सुबह 9 बजे शुरू हुई और शाम 4 बजे तक चली, जिसमें 90 सदस्यीय विधानसभा के 88 विधायकों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इनेलो के विधायकों ने मतदान से दूरी बनाए रखी। असली विवाद शाम 5 बजे मतगणना शुरू होने के वक्त पैदा हुआ। भाजपा ने कांग्रेस विधायक भरत सिंह बेनीवाल और परमवीर सिंह पर वोट की गोपनीयता भंग करने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से शिकायत की। वहीं, कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कैबिनेट मंत्री अनिल विज के वोट पर सवाल उठाए। शिकायतों के दौर और केंद्रीय चुनाव आयोग के दखल के कारण काउंटिंग साढ़े पांच घंटे रुकी रही। रात 10 बजे के बाद आयोग ने फैसला सुनाते हुए कांग्रेस विधायक परमवीर सिंह का वोट रद्द कर दिया, जबकि अनिल विज के वोट को सही माना। इसके बाद रात करीब एक बजे नतीजों की आधिकारिक घोषणा हो सकी।

कांग्रेस के लिए यह जीत जितनी राहत भरी है, उतनी ही आत्ममंथन वाली भी, क्योंकि पार्टी के पांच विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग करने की बात सामने आई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने जीत पर खुशी तो जताई, लेकिन उनके चेहरे पर अपनों के धोखे की टीस साफ नजर आई। हुड्डा ने इसे एक अग्निपरीक्षा करार देते हुए कहा कि जिन विधायकों ने ऐन मौके पर पार्टी के साथ गद्दारी की है, प्रदेश की जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी। जीत के बाद भावुक हुए कांग्रेस विधायकों को संभालते हुए हुड्डा ने चुनाव अधिकारी के रवैये को पक्षपातपूर्ण बताया और आरोप लगाया कि निर्दलीय उम्मीदवार के जरिए वोट चोरी की कोशिश की गई थी।

दूसरी ओर, कांग्रेस आलाकमान और राज्यसभा सदस्यों ने भाजपा पर लोकतंत्र के अपमान का आरोप लगाया। पार्टी प्रभारियों का कहना है कि सत्तापक्ष ने विधायकों की खरीद-फरोख्त और अनैतिक हथकंडों के जरिए चुनाव को प्रभावित करने की हर संभव कोशिश की। दीपेंद्र हुड्डा ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि भाजपा ने सिर्फ एक सीट जीतने के लिए लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रख दिया। हालांकि, तमाम बाधाओं और क्रॉस वोटिंग के बावजूद कांग्रेस अपनी एक सीट बचाने में सफल रही, लेकिन इस चुनाव ने प्रदेश की राजनीति में भविष्य के नए समीकरणों और अंतर्कलह को जन्म दे दिया है।

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