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राज्य सभा सांसद सतनाम संधू ने संसद में उठाया नहर आधारित सिंचाई प्रणाली को मज़बूत करने का मुद्दा

चंडीगढ/मोहाली : संसद के मौजूदा मानसून सत्र के दौरान, राज्य सभा सांसद सतनाम सिंह संधू द्वारा भारत भर में नहर नेटवर्क के निर्माण, पुनरुद्धार और मरम्मत के संबंध में उठाए गए एक प्रश्न के उत्तर में, केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने बताया कि खेतों तक पानी की पहुँच बढ़ाने और सुनिश्चित सिंचाई के तहत कृषि योग्य क्षेत्र का विस्तार करने, खेतों में जल उपयोग दक्षता में सुधार लाने और स्थायी जल संरक्षण प्रथाओं को लागू करने के उद्देश्य से, केंद्र सरकार ने वर्ष 2015-16 के दौरान प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) शुरू की थी, जिसमें एक्सिलरेटेड इरिगेशन बेनेफिट प्रोग्राम (एआईबीपी) और हर खेत को पानी (एचकेकेपी) दो प्रमुख अंग हैं।

राज्यसभा सांसद सतनाम संधू ने संसद में पूछे गए अपने सवाल में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय से चालू वित्तीय वर्ष और उससे आगे के लिए देश भर में नई नहरों के निर्माण की योजना की जानकारी भी मांगी।केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने लिखित उत्तर में बताया कि 2016-17 के दौरान 34.64 लाख हेक्टेयर की शेष सिंचाई क्षमता वाली 99 चालू वृहद और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं (एमएमआई) (7 चरणों में) को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (पीएमकेएसवाई-एआईबीपी) के अंतर्गत शामिल किया गया है। इसी प्रकार, मार्च 2021 से पीएमकेएसवाई 2.0 के अंतर्गत 5.60 लाख हेक्टेयर की अंतिम सिंचाई क्षमता वाली 11 नई एआईबीपी परियोजनाओं को शामिल किया गया है। इसके अलावा, रेणुका जी, लखवाड़ और शाहपुर कंडी राष्ट्रीय परियोजनाओं के साथ-साथ राजस्थान फीडर और सरहिंद फीडर की 2 रीलाइनिंग के लिए भी अप्रैल 2021 से पीएमकेएसवाई-एआईबीपी के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।

केंद्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि महाराष्ट्र की 8 एमएमआई और 83 सरफेस माइनर इरिगेशन (एसएमआई) परियोजनाओं को पूरा करने के लिए, जिनकी अनुमानित शेष लागत 13,651.61 करोड़ रुपये है, केंद्र सरकार द्वारा 2018-19 के दौरान वित्तीय सहायता के लिए एक विशेष पैकेज मंजूर किया गया है। अब तक 3 एमएमआई और 67 एसएमआई परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं।एक अन्य प्रश्न में, सांसद संधू ने पंजाब से होकर गुजरने वाली प्रस्तावित नई नहर परियोजनाओं के बारे में विवरण माँगा, साथ ही यह भी पूछा कि क्या केंद्र सरकार राज्य में मौजूदा नहर अवसंरचना के पुनरुद्धार, उन्हें गहरा करने , सीमांकन या सुदृढ़ीकरण के लिए किसी विशेष योजना पर विचार कर रही है और पिछले पाँच वर्षों के दौरान पंजाब में नहर पुनर्वास या मरम्मत परियोजनाओं का विवरण भी माँगा। जिस पर, जल शक्ति मंत्री ने उत्तर दिया कि पंजाब में दो भागों वाली एक प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजना प्रगति पर है विस्तार, नवीनीकरण और आधुनिकीकरण (ईआरएम) परियोजना और एक कमांड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन (सीएडी और डब्ल्यूएम) परियोजना, जो जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनरुद्धार विभाग द्वारा आंशिक रूप से वित्त पोषित है।

राज्य में नहरों के बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करने के लिए चल रही परियोजनाओं के बारे में विस्तार से बताते हुए, उन्होंने कहा, “केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय अपनी प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजना (राष्ट्रीय परियोजना) के तहत पंजाब के पठानकोट ज़िले में रावी नदी पर शाहपुरकंडी बाँध परियोजना का निर्माण कर रहा है। इसकी सिंचाई क्षमता 37,173 हेक्टेयर है, जिसमें से 5,000 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता पंजाब में होगी। यह परियोजना ऊपरी बारी दोआब नहर (यूबीडीसी) प्रणाली के 1.18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई को स्थिर करने में भी मदद करेगी।”इसके अलावा, एक्सटेंशन, रिनोवेशन और मॉडर्नाइजेशन (ईआरएम) परियोजना के अंतर्गत, सरहिंद फीडर नहर की रीलाइनिंग का कार्य प्रगति पर है जिससे 98,739 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई स्थिरीकरण और राजस्थान फीडर नहर की रीलाइनिंग से 69,096 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई स्थिरीकरण में मदद मिलेगी। कमांड एरिया डेवल्पमेंट एंड वाटर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट, के तहत पहले पटियाला फीडर और कोटला ब्रांच प्रोजेक्ट के पुनर्वास के अंतर्गत 142658 हेक्टेयर क्षेत्र का कमांड क्षेत्र विकास किया जाएगा।

जल शक्ति राज्य मंत्री ने कहा, “इसके अलावा, पंजाब में दो प्रोजेक्ट, कंडी नहर विस्तार फेज़ 2 और पहला पटियाला फीडर और कोटला ब्रांच प्रोजेक्ट (एआईबीपी घटक) का पुनर्वास, क्रमशः 23,330 हेक्टेयर और 91,990 हेक्टेयर की अंतिम सिंचाई क्षमता के साथ पीएमकेएसवाई-एआईबीपी के तहत पूरा हो चुका हैं।”पंजाब में नहर नेटवर्क के विकास के लिए किए गए कार्यों का विवरण साझा करते हुए, जल शक्ति राज्य मंत्री ने कहा, “पंजाब सरकार द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, 545 किलोमीटर लंबी कुल 79 नहरों का जीर्णोद्धार किया गया है। 213 किमी लंबी 12 नहरों वाली लूथर नहर प्रणाली, तरनतारन जिले में लगभग 23 नहरों को पुनर्जीवित किया गया है तथा मलेरकोटला जिले में नए क्षेत्रों को पानी उपलब्ध कराने के लिए  रोहिरा, कंगनवाल, डेहलों नहरों का विस्तार शामिल है।

राज्य सरकार ने मलेरकोटला, पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, फाजिल्का और मुक्तसर जिलों में नई नहरों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी है।” नहरों के निर्माण, पुनरुद्धार या मरम्मत के लिए पीएमकेएसवाई-एआईबीपी के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित परियोजनाओं के बारे में विवरण साझा करते हुए, राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा 122 नहर जल विकास और पुनरुद्धार परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जिनमें से 5 पंजाब में वित्तपोषित हैं। जल शक्ति राज्य मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने देश और पंजाब में नहर नेटवर्क प्रणाली को मजबूत करने के लिए इन विकासात्मक कार्यों को पूरा करने के लिए तकनीकी सहायता और चल रही योजनाओं के तहत पूरी हो चुकी या चिन्हित परियोजनाओं के लिए आंशिक वित्तीय सहायता प्रदान की है।

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