नई दिल्ली : भारत में पिछले कुछ समय से जारी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के संकट के बीच अब राहत मिलने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर एक बड़ी सफलता तब मिली जब एलपीजी वाहक जहाज शिवालिक सुरक्षित रूप से गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंच गया। इसके साथ ही मंगलवार, 17 मार्च को एक और मालवाहक जहाज के भारत पहुंचने की उम्मीद है। गैस की इस ताजा खेप के आने से घरेलू बाजार में मची हाहाकार और आपूर्ति की कमी से कुछ दिनों तक राहत मिलने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। मुंद्रा बंदरगाह के अधिकारियों के अनुसार, शिवालिक जहाज इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के लिए 46,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आया है।
इसमें से 20,000 मीट्रिक टन गैस मुंद्रा में उतारी जाएगी, जबकि शेष 26,000 मीट्रिक टन की आपूर्ति मंगलुरु बंदरगाह पर की जाएगी।वर्तमान संकट की जड़ें वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव में छिपी हैं। ईरान और अमेरिका के बीच छिड़े युद्ध के कारण दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री जलमार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर यातायात बाधित हो गया था। इस कारण वैश्विक स्तर पर शिपिंग रुक गई और भारत की ओर आने वाले कई जहाज रास्ते में ही फंस गए। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में आयात पर निर्भर है, जिसमें 60 प्रतिशत एलपीजी विदेशों से आती है। इस गतिरोध के बावजूद भारत अपने तीन जहाजों को सुरक्षित निकालने में सफल रहा है, जो घरेलू आपूर्ति बहाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।



