चंडीगढ़ – हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा ट्रैवल एजेंटों का पंजीकरण और विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2026 में केवल एक छोटा सा संशोधन किया गया है, जो केंद्र सरकार के प्रावधानों के अनुरूप है। इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।मुख्यमंत्री सोमवार को हरियाणा विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के दौरान सदन में प्रस्तुत हरियाणा ट्रैवल एजेंटों का पंजीकरण और विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2026 पर बोल रहे थे। यह विधेयक हरियाणा ट्रैवल एजेंटों का पंजीकरण और विनियमन अधिनियम, 2025 को संशोधित करने के लिए लाया गया है।
उन्होंने सदन को अवगत करवाया कि संशोधित प्रावधानों के अनुसार यदि कोई ट्रैवल एजेंट किसी व्यक्ति को विदेश में सेवा या रोजगार के लिए भेजता है और उसे वर्क परमिट उपलब्ध कराता है, तो उसे संबंधित केंद्रीय अधिनियम के अनुसार अपना पंजीकरण करवाना होगा। इसके साथ ही एजेंट को इस संबंध में आवश्यक जानकारी भी देनी होगी।मुख्यमंत्री ने बताया कि जब यह विधेयक पहले सदन में पारित हुआ था जिसके बाद राज्य सरकार ने इसे राष्ट्रपति के पास भेजा था। राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा इसे विदेश मंत्रालय को भेजा गया, जहां से सुझाव दिया गया कि विधेयक में उनके प्रावधानों के अनुरूप संशोधन किया जाए। उन्हीं सुझावों के आधार पर राज्य सरकार इसमें मामूली संशोधन लेकर सदन में दोबारा लाई है।
उन्होंने कहा कि विदेश से जुड़े मामलों में राज्य सरकार को विदेश मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही कानून बनाना पड़ता है। पिछली बार जब यह विधेयक भेजा गया था, उस समय तीन नए कानून लागू हो गए थे, जिसके कारण इसमें कुछ तकनीकी संशोधन करना आवश्यक हो गया था।मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के संकल्प पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति प्रदेश के युवाओं को अवैध तरीके से ‘डंकी रूट’ के माध्यम से विदेश भेजने का प्रयास करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश का कोई भी युवा डंकी रूट के जरिए विदेश न जाए।
उन्होंने कहा कि यह कानून भारत के संविधान के अनुरूप बनाया गया है। राज्य द्वारा बनाए जाने वाले सभी कानून संविधान और केंद्रीय प्रावधानों के अनुरूप होने चाहिए। यदि केंद्र सरकार या संबंधित मंत्रालय किसी संशोधन का सुझाव देता है, तो राज्य सरकार का दायित्व बनता है कि वह उसके अनुरूप आवश्यक संशोधन करे।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केंद्रीय कानूनों के विरुद्ध नहीं जा सकती और इसलिए यह संशोधन पूरी तरह से संवैधानिक प्रावधानों तथा केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप किया गया है।



