नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ मंगलवार को राष्ट्रपति द्वारा उठाए गए 14 सवालों पर विचार करने के लिए तैयार हो गई है। दरअसल राष्ट्रपति मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले पर ये सवाल उठाए थे, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति और राज्यपालों को किसी विधेयक को मंजूरी देने की समयसीमा तय करने को कहा था। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस ए एस चंदूरकर की सदस्यता वाली संविधान पीठ अगस्त के मध्य से इस पर सुनवाई शुरू करेगी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान के अनुच्छेद 143 (1) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए थे। संविधान का अनुच्छेद 143(1) राष्ट्रपति के सुप्रीम कोर्ट से विचार-विमर्श करने से संबंधित है। इसमें कहा गया है, यदि किसी भी समय राष्ट्रपति को ऐसा प्रतीत हो कि किसी कानून या तथ्य का लेकर कोई सवाल उठ रहा है, या उठ सकता है, जो सार्वजनिक महत्व का हो तो उस पर सर्वोच्च न्यायालय की राय ली जा सकती है। राष्ट्रपति उस सवाल को सर्वोच्च न्यायालय के पास भेज सकता हैं और न्यायालय, सुनवाई के बाद राष्ट्रपति को उस सवाल पर अपनी राय से अवगत करा सकता है।



