नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने गुरुवार को कई राज्यों के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए भारतीय विदेश सेवा के पूर्व अधिकारी तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया लेफ्टिनेंट गवर्नर नियुक्त किया है। वह मौजूदा उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना का स्थान लेंगे। वहीं, विनय कुमार सक्सेना को लद्दाख का नया लेफ्टिनेंट गवर्नर बनाया गया है।तरनजीत सिंह संधू भारतीय विदेश सेवा के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं और उन्हें कूटनीतिक मामलों का लंबा अनुभव है।
उन्होंने फरवरी 2020 में अमेरिका में भारत के राजदूत के रूप में पदभार संभाला था और जनवरी 2024 तक इस पद पर कार्य किया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने 2024 में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। इसके बाद पार्टी ने उन्हें लोकसभा चुनाव में पंजाब की अमृतसर सीट से उम्मीदवार भी बनाया था।वहीं, विनय कुमार सक्सेना ने 26 मई 2022 को दिल्ली के 22वें उपराज्यपाल के रूप में पदभार ग्रहण किया था। उनकी नियुक्ति अनिल बैजल के इस्तीफे के बाद हुई थी। इससे पहले वह खादी और ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष के रूप में कार्य कर चुके हैं।
दिल्ली में उनके कार्यकाल के दौरान कई प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार और उपराज्यपाल कार्यालय के बीच मतभेद भी देखने को मिले थे। अब उन्हें लद्दाख का नया लेफ्टिनेंट गवर्नर नियुक्त किया गया है।इस व्यापक फेरबदल के तहत कई राज्यों में भी राज्यपालों की नई नियुक्तियां की गई हैं। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला को तेलंगाना का राज्यपाल बनाया गया है, जबकि तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
वरिष्ठ नेता नंद किशोर यादव को नागालैंड का राज्यपाल बनाया गया है।इसके अलावा, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन को बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया है, जबकि केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर अब तमिलनाडु के राज्यपाल का दायित्व संभालेंगे। वहीं लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले को प्रशासनिक पुनर्संरचना और राज्यों में शासन व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



