HomeHealth & Fitnessमीठा नहीं ये आदतें दे रही हैं डायबिटीज की बीमारी को न्योता

मीठा नहीं ये आदतें दे रही हैं डायबिटीज की बीमारी को न्योता

Health News : वर्तमान समय में आगे बढ़ने की होड़, काम का दबाव और समय की कमी तन और मन दोनों को प्रभावित कर रही है। इसका नतीजा यह हो रहा है कि शरीर धीरे-धीरे कई गंभीर बीमारियों की गिरफ्त में आ रहा है। इन्हीं बीमारियों में डायबिटीज आज सबसे तेजी से फैलने वाली समस्या बन चुकी है, जो अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बच्चे और युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। डायबिटीज को लेकर आम धारणा यही है कि यह सिर्फ मीठा खाने से होती है, जबकि हकीकत इससे कहीं अलग है। दरअसल, डायबिटीज एक लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी है, जिसमें रोजमर्रा की गलत आदतें अहम भूमिका निभाती हैं। यह बीमारी तब होती है जब शरीर में ग्लूकोज यानी शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है। इसका सीधा संबंध पैंक्रियाज से होता है, जो इंसुलिन हार्मोन बनाता है।

इंसुलिन शरीर में शर्करा को नियंत्रित करने का काम करता है, लेकिन जब पैंक्रियाज पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या बिल्कुल नहीं बनाता, तो रक्त में शर्करा की मात्रा बढ़ने लगती है और डायबिटीज की समस्या पैदा हो जाती है। सिर्फ मीठा ही नहीं, बल्कि गलत समय पर खाया गया भोजन भी डायबिटीज को बढ़ावा देता है। बाहर का तला-भुना और अस्वच्छ खाना, जंक फूड, मैदा से बने खाद्य पदार्थ और डिब्बाबंद चीजों का अधिक सेवन इस बीमारी के प्रमुख कारणों में शामिल है। ये सभी चीजें शरीर में शर्करा के स्तर को तेजी से बढ़ाती हैं और इंसुलिन पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं। आज की जीवनशैली में शारीरिक गतिविधि भी काफी कम हो गई है। ज्यादातर लोग घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं और चलना-फिरना बेहद सीमित हो गया है। कम गतिविधि की वजह से शरीर रक्त में मौजूद शर्करा का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता, जिससे शुगर लेवल बढ़ने लगता है और इंसुलिन का असंतुलन पैदा हो जाता है।

यही स्थिति धीरे-धीरे डायबिटीज का रूप ले लेती है। नींद की कमी भी डायबिटीज के खतरे को बढ़ाती है। नींद हमारे शरीर के पूरे सिस्टम को री-स्टार्ट करने का काम करती है। पर्याप्त नींद न मिलने से हार्मोनल असंतुलन होता है, जिसका असर इंसुलिन पर पड़ता है। इसके अलावा लगातार तनाव लेना भी डायबिटीज को बुलावा देने जैसा है। तनाव के दौरान शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन ज्यादा बनने लगता है, जिससे ब्लड प्रेशर और रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ जाता है। बार-बार खाने की आदत भी इस बीमारी का एक बड़ा कारण है। पेट को भोजन पचाने में करीब दो घंटे का समय लगता है। इस बीच दोबारा खाने से इंसुलिन को आराम नहीं मिल पाता और रक्त में शर्करा की मात्रा बढ़ने लगती है। ऐसे में संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव से दूरी बनाकर ही डायबिटीज से बचाव संभव है। बदलती जीवनशैली ने इंसान को सुविधाएं तो बहुत दी हैं, लेकिन सेहत के मोर्चे पर इसकी कीमत भी चुकानी पड़ रही है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में न तो संतुलित खानपान मिल पा रहा है और न ही नियमित व्यायाम के लिए समय निकल पाता है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments