चंडीगढ़ -चंडीगढ़ के मेयर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने एकतरफा जीत दर्ज करते हुए सौरव जोशी को नया मेयर बना दिया है। साथ ही भाजपा के जशनप्रीत सिंह सीनियर डिप्टी मेयर और सुमन शर्मा डिप्टी मेयर चुनी गईं। कुल 29 सदस्यीय सदन में भाजपा को 18 वोट मिले, वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी गुरप्रीत को 7 और आप के योगेश ढींगरा को 11 वोट पड़े। यह जीत केवल संख्या की नहीं, बल्कि सियासी रणनीति की भी मानी जा रही है। चुनाव परिणाम से पहले ही भाजपा नेताओं द्वारा बधाइयों का दौर शुरू हो जाना इस बात का संकेत था कि तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है।
गठबंधन टूटने का सीधा फायदा – राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी मिलकर चुनाव लड़तीं, तो दोनों के वोट मिलकर 18-18 हो जाते और मुकाबला टाई तक पहुंच सकता था। ऐसी स्थिति में पर्ची से फैसला होता, जो पूरी तरह किस्मत पर निर्भर रहता। लेकिन गठबंधन न होने से भाजपा के लिए रास्ता आसान हो गया।यही वजह रही कि इस बार चुनाव में भाजपा की जीत पहले से तय मानी जा रही थी, जिस पर आज मुहर लग गई। डिप्टी मेयर चुनाव में कांग्रेस पार्षदों के वॉकआउट ने भी विपक्ष की स्थिति को कमजोर किया। वहीं आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुई सुमन शर्मा का डिप्टी मेयर बनना सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या इसे पार्टी छोडऩे का इनाम कहा जाए?हालांकि भाजपा इसे संगठन की मजबूती और नेतृत्व पर भरोसे का परिणाम के नजरिया से देख सकती है।
बिना विवाद के चुनाव, हाथ उठाकर मतदान – इस बार चुनाव की खास बात यह रही कि मतदान हाथ उठाकर कराया गया। न तो क्रॉस वोटिंग हुई और न ही किसी प्रकार के आरोप-प्रत्यारोप सामने आए। आज़ाद उम्मीदवार रामचंद्र पहले ही नामांकन वापस ले चुके थे, जिससे मुकाबला और स्पष्ट हो गया। चंडीगढ़ में मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का कार्यकाल एक वर्ष का होता है और यह वर्ष इस निगम का अंतिम वर्ष है। अगली बार फिर से पार्षदों के चुनाव होंगे।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि 2027 में पंजाब विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अलग-अलग अपनी विचारधाराओं के साथ जनता के सामने जाना चाहती हैं। यदि दोनों चंडीगढ़ में गठबंधन करतीं, तो उन्हें जनता के बीच यह जवाब देना मुश्किल होता कि अलग विचारधारा होने के बावजूद सत्ता के लिए एक साथ क्यों आईं।
एकता में बल होता है – बुजुर्गों की कहावत फिर हुई सच हमारे बुजुर्ग कहा करते थे— एकता में बल होता है। चंडीगढ़ मेयर चुनाव ने इस कहावत को एक बार फिर साबित कर दिया। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की आपसी एकजुटता की कमी ने भाजपा को खुली जीत दिला दी। यदि दोनों साथ आते, तो भाजपा के लिए मुश्किलें जरूर खड़ी हो सकती थीं।



