नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस के एमजीएनआरईजीए बचाओ संग्राम की तीन प्रमुख मांगों को रेखांकित कर इस बात पर जोर दिया कि यह योजना दान नहीं बल्कि एक कानूनी गारंटी है। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने कहा कि कांग्रेस केंद्र सरकार से हाल ही में पारित विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) अधिनियम को वापस लेने, एमजीएनआरईजीए को अधिकार-आधारित कानून के रूप में बहाल करने और काम के अधिकार और पंचायतों के अधिकार को बहाल करने की मांग करती है।
कांग्रेस नेता खरगे ने कहा कि एमजीएनआरईजीए दान नहीं है। यह एक कानूनी गारंटी है। करोड़ों सबसे गरीब लोगों को उनके अपने गांवों में काम मिला, एमजीएनआरईजीए ने भूख और संकटग्रस्त पलायन को कम किया, ग्रामीण मजदूरी बढ़ाई और महिलाओं की आर्थिक गरिमा को मजबूत किया कांग्रेस नेता खरगे ने आरोप लगाया कि वीबी-जी राम जी अधिनियम एमजीएनआरईजीए की अधिकार-आधारित संरचना को नष्ट करता है, क्योंकि यह गारंटीकृत कार्य को मनमानी से बदल देगा, नियंत्रण को केंद्रीकृत करेगा और ग्राम सभाओं और राज्यों को कमजोर करेगा।
खरगे ने कहा कि वीबी ग्राम जी अधिनियम इसी अधिकार को समाप्त करने के लिए लाया गया है। कांग्रेस इसका विरोध करती है, क्योंकि काम अब गारंटीकृत अधिकार नहीं रहेगा, बल्कि चुनिंदा पंचायतों में केवल एक अनुमति होगी। बजट सीमित कर दिए जाएंगे, इसलिए संकट के समय में भी धन समाप्त होते ही काम भी बंद होगा। दिल्ली निधि और कार्यों का निर्णय करेगी, जिससे ग्राम सभाएं और पंचायतें अप्रासंगिक हो जाएंगी। 60 दिनों के काम पर रोक से संकट के चरम समय में काम से इंकार करना वैध हो जाएगा।
मजदूरी एक संरक्षित अधिकार होने के बजाय अनिश्चित और दमनीय हो जाएगी। राज्यों को 40 प्रतिशत निधि प्रदान करने के लिए मजबूर किया जाएगा, जिससे संघवाद कमजोर होगा और गरीब राज्यों को नुकसान होगा। प्रौद्योगिकी बायोमैट्रिक और ऐप-आधारित बाधाओं के माध्यम से श्रमिकों को बाहर कर देगी। ग्राम संपत्तियों को ठेकेदार शैली की परियोजनाओं से बदल दिया जाएगा। खरगे ने कहा कि एमजीएनआरईजीए पर हमला करोड़ों श्रमिकों और उनके संवैधानिक अधिकारों पर हमला है। हम हर पंचायत से लेकर संसद तक शांतिपूर्ण और दृढ़ता से इसका विरोध करने वाले है।



