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नीट मामला: दिग्विजय ने पीएम मोदी पर जताया भरोसा,बोले- छात्रों के साथ नहीं होगा अन्याय

नई दिल्ली। नीट परीक्षा विवाद के बीच सोमवार को शिक्षा मंत्रालय से संबंधित संसदीय समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक के दौरान समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश की संस्थागत व्यवस्था पर भरोसा जताते हुए कहा, उन्हें विश्वास है कि छात्रों के साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होगा और उनके हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।कांग्रेस नेता और समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि नीट का मुद्दा राजनीतिक नहीं, बल्कि लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों की चिंता से जुड़ा विषय है।

उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना और विद्यार्थियों का भरोसा कायम रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।  बैठक में 21 जून को प्रस्तावित नीट पुनर्परीक्षा की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई। समिति ने परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के उपायों की जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए इन-हाउस पेपर सेटर्स, शिक्षकों और प्रोफेसरों की सहायता ली जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या पेपर लीक की संभावना को समाप्त किया जा सके।

जांच के बीच बैठक पर उठे सवाल – बैठक शुरू होने से पहले हुई अनौपचारिक चर्चा में कुछ सत्तापक्ष सांसदों ने जांच प्रक्रिया जारी रहने के बीच ऐसी बैठकों की आवश्यकता पर सवाल उठाए। इस पर दिग्विजय सिंह ने दोहराया कि समिति का उद्देश्य राजनीतिक बहस नहीं, बल्कि छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं का समाधान सुनिश्चित करना है।

सदस्यों ने दिए अनेक सुझाव – समिति के सदस्यों ने सुझाव दिया कि पुनर्परीक्षा से पहले छात्रों का विश्वास बहाल करना बेहद जरूरी है। कुछ सदस्यों ने यह भी प्रस्ताव रखा कि प्रधानमंत्री या शिक्षा मंत्री की ओर से विद्यार्थियों के नाम एक संदेश जारी किया जाए, जिससे उन्हें यह भरोसा मिले कि सरकार उनके साथ खड़ी है। साथ ही स्वास्थ्य मंत्रालय के सहयोग को बढ़ाने, भविष्य में कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) प्रणाली को और मजबूत करने तथा परीक्षा प्रबंधन से जुड़े नवाचारों को बढ़ावा देने की भी सिफारिश की गई।

बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद – समिति की इस बैठक में भाजपा की ओर से रवि शंकर प्रसाद, घनश्याम तिवारी, बांसुरी स्वराज और संबित पात्रा मौजूद रहे, जबकि विपक्ष की ओर से टी सुमथि, राजीव राय और डीन कुरैकोज ने भाग लिया। समिति ने उम्मीद जताई कि 21 जून की पुनर्परीक्षा निष्पक्ष, सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न होगी तथा इससे छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा मजबूत होगा।

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