नई दिल्ली। यूपी,बिहार जैसे कई राज्यों में तेज हवा के साथ बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने इस आशय का अलर्ट जारी किया है। 1 जुलाई तक यूपी में बारिश के आसार हैं। वहीं, अगले कुछ दिनों में राज्य में मॉनसून के आगे बढ़ने को लेकर भी स्थिति अनुकूल बनी हुईं हैं। वहीं, मध्य भारत के राज्यों में भी 4 जुलाई तक मौसम खुशनुमा रहने की संभावनाएं हैं। हिमाचल प्रदेश में 1 जुलाई तक और जम्मू और कश्मीर, गिलगिट, बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद में बारिश हो सकती है। इन क्षेत्रों में 30 जून को ओलावृष्टि भी हो सकती है।
वहीं, हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़ और पंजाब में 29 जून और 1 और 2 जुलाई को छिटपुट बारिश हो सकती है। पश्चिम उत्तर प्रदेश में 1 जुलाई तक और फिर 3-4 जुलाई को, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 30 जून तक और फिर 4 जुलाई को ऐसा मौसम रह सकता है। साथ ही तेज हवा और आंधी के आसार भी हैं। पूर्वी और पश्चिम राजस्थान में 4 जुलाई तक बारिश के आसार हैं। जम्मू और कश्मीर, गिलगिट, बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद और पंजा में 2-3 जुलाई को भारी बारिश हो सकती है। हिमाचल प्रदेश में 1 से 4 जुलाई तक, उत्तराखंड में 30 जून से 4 जुलाई तक, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 30 जून से 1 जुलाई और पूर्वी राजस्थान में 2 से 4 जुलाई तक भारी बारिश की संभावनाएं हैं।
हालांकि, विभाग ने 28 और 29 जून को उत्तर प्रदेश में लू चलने की चेतावनी भी दी है, जो कुछ स्थानों पर गंभीर रूप ले सकती है। मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट के अनुसार, यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो दिल्ली में चार जुलाई तक मॉनसून पहुंचने की संभावना है। आईएमडी की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 3-4 दिनों में मॉनसून उत्तरी अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ सकता है। मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि 4 जुलाई तक छत्तीसगढ़, विदर्भ, पूर्वी मध्य प्रदेश और पश्चिम मध्य प्रदेश में बारिश हो सकती है।
छत्तीसगढ़ में 2 जुलाई तक गरज और आंधी के भी आसार हैं। संभावनाएं जताई जा रही हैं कि आने वाले 2-3 दिनों तक गरज जारी रह सकती है। मौसम विभाग ने रविवार को कहा कि अगले पांच. छह दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के उत्तर भारत के कई राज्यों में सक्रिय रूप से आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। आईएमडी ने एक विज्ञप्ति में कहा कि अगले दो से तीन दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के उत्तर अरब सागर के कुछ और हिस्सों तथा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड सहित कुछ अन्य राज्यों के क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं।



