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5 सांसद पाला बदलने को तैयार, शिंदे गुट में शामिल होने पर फंसा पेंच,शरद पवार के खेमे में टूट की आशंका

मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े उलटफेर और बगावत की सुगबुगाहट तेज हो गई है, जिससे राज्य का राजनीतिक परिदृश्य गरमा गया है। हाल ही में उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (यूबीटी) के छह लोकसभा सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने के बाद, अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि अगला निशाना शरद पवार की पार्टी एनसीपी (एसपी) हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, शरद पवार गुट के कम से कम पांच लोकसभा सांसद विपक्षी महाविकास अघाड़ी (एमवीए) का साथ छोड़कर सत्ताधारी महायुति गठबंधन का दामन थामने की तैयारी में हैं, जिससे एनडीए की लोकसभा सीटों में और इजाफा हो सकता है।

हालांकि, इस संभावित टूट के पीछे एक बेहद दिलचस्प और जटिल पेंच फंसा हुआ है। आमतौर पर किसी पार्टी में टूट होने पर उसके बागी सांसद या विधायक अपने ही विरोधी धड़े में शामिल होते हैं, लेकिन इस मामले में चौंकाने वाली बात यह है कि एनसीपी (एसपी) के इन सांसदों को अजीत पवार के नेतृत्व वाले पारंपरिक विरोधी गुट द्वारा नहीं, बल्कि एकनाथ शिंदे की शिवसेना द्वारा पाले में लाने की कोशिश की जा रही है।बता दें कि एनसीपी की कमान अब सुनेत्रा पवार के हाथों में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे अजीत पवार की पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी कलह और अस्थिरता सबसे बड़ी वजह है। अजीत पवार के गुट में जारी संगठनात्मक उथल-पुथल और नेतृत्व की कमजोर स्थिति उसे दूसरी पार्टी में बड़ी सेंधमारी करने की स्थिति में नहीं छोड़ रही है।

अजीत पवार की पार्टी में इस समय अंदरूनी खींचतान चरम पर है, जिसकी मुख्य वजह उनके बेटे पार्थ पवार का तेजी से बढ़ता वर्चस्व माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि पार्थ पवार वरिष्ठ और कद्दावर नेताओं जैसे कि प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे को भरोसे में लिए बिना संगठन से जुड़े बड़े और महत्वपूर्ण फैसले ले रहे हैं। इस रवैए के कारण पार्टी के पुराने और अनुभवी नेताओं में भारी नाराजगी और असहजता का माहौल है। बात सिर्फ पार्टी संगठन तक ही सीमित नहीं है, आरोप यह भी लग रहे हैं कि पार्थ पवार अब देवेंद्र फडणवीस सरकार में शामिल एनसीपी कोटे के मंत्रियों के कामकाज और उनके विभागों में भी सीधा दखल देने लगे हैं।

सूत्रों के अनुसार, एनसीपी के कुछ मंत्रियों ने शीर्ष स्तर पर शिकायत दर्ज कराई है कि पार्थ पवार उनके अधीन आने वाले विभागों द्वारा जारी किए जाने वाले टेंडरों की विस्तृत और गोपनीय जानकारी मांग रहे हैं, जिससे उनके कामकाज में अनावश्यक हस्तक्षेप बढ़ रहा है। महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम पर बारीक नजर रखने वाले जानकारों का कहना है कि पार्थ पवार अपने पिता की राजनीतिक विरासत पर पूरी तरह से नियंत्रण हासिल करने के लिए बहुत तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। वे पार्टी के भीतर खुद को निर्विवाद नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश में जुटे हैं। उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे दिल्ली में भी अपनी जमीन मजबूत कर रहे हैं।

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