रायपुर। भारतीय लोक कला और संस्कृति के आकाश से एक सितारा अब अस्त हो गया है। देश की प्रतिष्ठित पंडवानी गायिका और सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से अलंकृत तीजन बाई का लंबी बीमारी के बाद रविवार तड़के रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया। एम्स के पीआरओ ने उनके निधन की दुखद पुष्टि की, जिसके बाद पूरे कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। पीएम नरेंद्र मोदी ने तीजन बाई के निधन प दुख व्यक्त करते हुए कहा कि लोक कला को पूरी दुनिया में उन्होंने पहचान दिलाई।जानकारी के अनुसार, तीजन बाई पिछले कई हफ्तों से गंभीर रूप से बीमार थीं और रायपुर एम्स में भर्ती थीं। स्वास्थ्य में लगातार गिरावट के चलते आज तड़के करीब 3:15 बजे अचानक उनकी तबीयत और बिगड़ी, जिसके बाद उन्होंने अंतिम सांस ली।
उनके निधन की खबर ने उन लाखों प्रशंसकों और कला प्रेमियों को स्तब्ध कर दिया है, जो उनकी जादुई आवाज और मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुति से मोहित थे। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के गनियारी गांव में वर्ष 1956 में जन्मी तीजन बाई का जीवन संघर्ष, दृढ़ संकल्प और कला के प्रति अदम्य निष्ठा की एक प्रेरणादायक गाथा है। उन्होंने लोक कला पंडवानी (महाभारत की पारंपरिक कथा गायन शैली) को न केवल जीवंत रखा, बल्कि उसे एक अभूतपूर्व नया आयाम भी दिया। तीजन बाई ने उस दौर में पंडवानी की कापालिक शैली को अपनाया, जिस पर पारंपरिक रूप से पुरुषों का वर्चस्व था। इस साहसिक कदम के लिए उन्हें शुरुआत में भारी सामाजिक विरोध और रूढ़िवादी बंधनों का सामना करना पड़ा।
लेकिन अपनी दमदार आवाज, कड़क अभिनय, बेजोड़ अभिव्यक्ति कला और हाथ में तंबूरा लिए जब वे मंच पर उतरती थीं, तो श्रोता उनकी जादुई प्रस्तुति में मंत्रमुग्ध हो जाते थे। उन्होंने अपनी कला से न सिर्फ पंडवानी को जीवित रखा, बल्कि उसे जन-जन तक पहुंचाया और कलाकारों की कई पीढ़ियों को प्रेरित किया। पांच दशकों से अधिक के अपने शानदार करियर में, उन्होंने देश ही नहीं, बल्कि एशिया और यूरोप सहित दुनिया के कई कोनों में छत्तीसगढ़ की माटी की इस अनूठी कला का परचम लहराया। सामाजिक बाधाओं और पारंपरिक विरोध के बावजूद, उन्होंने पंडवानी को संरक्षित किया और उसे अत्यधिक लोकप्रिय बनाया, जिससे भारत की सबसे विशिष्ट लोक परंपराओं में से एक को वैश्विक पहचान मिली।
कई सम्मानों से सम्मानित हुईं तीजन बाई – लोक संस्कृति और कला के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए तीजन बाई को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से विभूषित किया गया था। इनमें पद्म श्री (1987/88), पद्म भूषण (2003) और पद्म विभूषण (2019) जैसे प्रतिष्ठित सम्मान शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। तीजन बाई का जाना भारतीय लोक कला के लिए एक अपूरणीय क्षति है, लेकिन उनकी विरासत, उनका संगीत और उनकी संघर्ष गाथा सदैव अमर रहेगी, जो आने वाली पीढ़ियों को कला और जीवन के प्रति समर्पण की प्रेरणा देती रहेगी।
तीजन बाई जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीजन बाई के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में एक विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति!



