नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम आपूर्ति के मुद्दे पर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश के एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद भाजपा सांसद एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने वर्ष 2010 में ऑस्ट्रेलिया द्वारा भारत को यूरेनियम बेचने से इनकार किए जाने का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस पर इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया।दरअसल जयराम रमेश ने अपने एक बयान में कहा था, कि ऑस्ट्रेलिया द्वारा भारत को यूरेनियम आपूर्ति संभव होना वर्ष 2008 में लागू हुए भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु सहयोग समझौते का परिणाम है। उन्होंने कहा कि इस समझौते की नींव जुलाई 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के बीच हुई वार्ता से पड़ी थी।
उन्होंने यह भी कहा, कि भाजपा ने उस समय संसद और संसद के बाहर इस समझौते का विरोध किया था और अब उसी उपलब्धि का खुद श्रेय लेने का प्रयास कर रही है। जयराम रमेश के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए संबित पात्रा ने कहा, कि यदि 2008 का समझौता भारत के लिए यूरेनियम आपूर्ति सुनिश्चित कर चुका था, तो वर्ष 2010 में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को यूरेनियम बेचने से इनकार क्यों किया था। उन्होंने कांग्रेस पर चुनिंदा इतिहास प्रस्तुत करने का आरोप लगाया। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ऐतिहासिक असैन्य परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर हुए, जिसके बाद दोनों देशों के बीच यूरेनियम आपूर्ति का मार्ग प्रशस्त हुआ। उनके अनुसार, इसी समझौते ने भारत-ऑस्ट्रेलिया परमाणु सहयोग को नई दिशा दी।
इस मुद्दे को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के बीच यह विवाद भारत के असैन्य परमाणु कार्यक्रम और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के श्रेय को लेकर सामने आया है। कांग्रेस जहां 2008 के भारत-अमेरिका परमाणु समझौते को इसकी आधारशिला बता रही है, वहीं भाजपा का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया के साथ 2014 में हुए द्विपक्षीय समझौते के बाद ही यूरेनियम आपूर्ति का रास्ता वास्तविक रूप से खुला। फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बना हुआ है और दोनों दल अपने-अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को प्रमुखता से सामने रख रहे हैं।



