कोलकाता। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को लेकर बड़ा संदेश देते हुए कहा कि अब देश की सोच यह नहीं होनी चाहिए कि भारत को दुनिया से क्या खरीदना है, बल्कि यह होनी चाहिए कि दुनिया भारत से क्या खरीदना चाहती है। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता अब केवल नीति नहीं, बल्कि युद्धक्षेत्र की क्षमता बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है।राजनाथ सिंह ने यह बात करीब 3,500 करोड़ रुपये की पांच रक्षा परियोजनाओं का शिलान्यास करते हुए कही।
ये परियोजनाएं पश्चिम बंगाल में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) और यंत्र इंडिया लिमिटेड की नई सुविधाओं से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि स्वदेशी हथियार प्रणालियां देश की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने भारत में विकसित हथियार प्रणालियों की क्षमता को देखा।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जीआरएसई की क्षमताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत को ऐसा रक्षा औद्योगिक आधार तैयार करना होगा, जिसकी गुणवत्ता पर दुनिया भरोसा करे, कीमत प्रतिस्पर्धी हो और समय पर डिलीवरी के कारण ग्राहक दोबारा ऑर्डर दें।
उन्होंने कहा कि जीआरएसई के पास तकनीकी विशेषज्ञता, कुशल कार्यबल और अब बढ़ी हुई उत्पादन क्षमता भी होगी। इसका पूरा इस्तेमाल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि जीआरएसई भारतीय नौसेना के लिए युद्धपोत बनाने के साथ एक जर्मन कंपनी के लिए 12 मालवाहक जहाज भी तैयार कर रहा है। इसे मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड की नीति के अनुरूप बताते हुए उन्होंने कहा कि क्षमता बढ़ने के साथ भारतीय कंपनियों को घरेलू और वैश्विक बाजार में अधिक आक्रामक तरीके से प्रतिस्पर्धा करनी होगी।



