इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। यह पर्व इस बार केवल धार्मिक आस्था और उल्लास तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी यह दिन एक अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक संयोग लेकर आ रहा है। ग्रहों की चाल और नक्षत्रों की स्थिति इस बार ऐसी अद्भुत पटकथा लिख रही है, जो सदियों में कभी-कभार ही देखने को मिलती है।ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस जन्माष्टमी पर ब्रह्मांड के 7 मुख्य ग्रहों में से 5 ग्रह अत्यंत शक्तिशाली और अनुकूल स्थिति में विराजमान रहेंगे। जहां मन के कारक चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में संचार करेंगे, वहीं ज्ञान और भाग्य के दाता गुरु (बृहस्पति) अपनी उच्च राशि कर्क में स्थित होकर नवग्रह मंडल को अलौकिक ऊर्जा प्रदान करेंगे।
इसके साथ ही आत्मा के कारक सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में और दैत्य गुरु शुक्र अपनी स्वराशि तुला में विराजेंगे। इतना ही नहीं, बुद्धि के दाता बुध अपने मित्र ग्रह की राशि में रहकर शुभ फल देंगे, जबकि मंगल और शुक्र के बीच बन रहा नवपंचम राजयोग धन, वैभव और ऐश्वर्य में अप्रत्याशित वृद्धि के द्वार खोलेगा। ज्योतिषशास्त्र में जब इतने प्रमुख ग्रह एक साथ अपनी उच्च और स्वराशि में होते हैं, तो वह कालखंड महाकल्याणकारी माना जाता है।ग्रहों के इस दुर्लभ महासंयोग का शुभ प्रभाव यूँ तो सभी 12 राशियों पर देखने को मिलेगा, लेकिन 4 विशेष राशियां ऐसी हैं जिनके लिए यह जन्माष्टमी किसी वरदान से कम साबित नहीं होगी। वृषभ राशि वालों के लिए, जन्माष्टमी पर चंद्रमा के आपकी ही राशि में उच्च के होकर स्थित रहने से आपके मान-सम्मान और पद-प्रतिष्ठा में भारी वृद्धि होगी।
कार्यक्षेत्र में लंबे समय से रुके हुए काम पूरे होंगे, धन आगमन के नए मार्ग खुलेंगे और नया निवेश करने के लिए यह समय सर्वोत्तम रहेगा। कर्क राशि के जातकों को अपनी राशि के स्वामी चंद्रमा का उच्च होना और गुरु का आपकी ही राशि में उच्च होकर बैठना एक अत्यंत दुर्लभ महाभाग्यशाली योग का निर्माण कर रहा है। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नई जॉब का बेहतरीन ऑफर मिल सकता है, व्यापार में मनचाहा लाभ होगा और परिवार में मांगलिक व धार्मिक कार्यों का आयोजन होगा। सिंह राशि वालों के लिए, सूर्य देव का अपनी ही स्वराशि सिंह में विराजमान रहना आपके आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को सातवें आसमान पर ले जाएगा। सरकारी क्षेत्र या उच्च अधिकारियों से आपको भरपूर सहयोग मिलेगा, समाज में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
पैतृक संपत्ति से लाभ होने के प्रबल योग हैं और अचानक धन लाभ की संभावना बनी हुई है। वहीं, तुला राशि के लोगों के लिए, राशि स्वामी शुक्र का अपनी स्वराशि तुला में होना और मंगल के साथ शुभ नवपंचम योग बनाना आपके जीवन में भौतिक सुख-सुविधाओं की बरसात करेगा। आपकी आर्थिक स्थिति पहले से काफी मजबूत होगी, बिजनेस में बड़ी डील फाइनल हो सकती है और कला, मीडिया, फैशन तथा क्रिएटिव फील्ड से जुड़े लोगों के लिए यह समय वरदान समान साबित होगा।इस शुभ संयोग के दौरान भगवान श्री कृष्ण को माखन-मिश्री और पंजीरी का भोग लगाएं। साथ ही पूजन में तुलसी दल जरूर शामिल करें और ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। इससे ग्रहों का शुभ प्रभाव कई गुना बढ़ जाएगा और जीवन में समृद्धि व खुशहाली आएगी।



