HomeNationalदिल्ली में इमारत ढहने से भीषण त्रासदी,अब तक 6 की मौत

दिल्ली में इमारत ढहने से भीषण त्रासदी,अब तक 6 की मौत

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर को एक पांच मंजिला इमारत के ढह जाने से एक दर्दनाक हादसा हो गया, जिसमें कम से कम छह छात्रों की मौत हो गई। इस इमारत का इस्तेमाल पीजी (पेइंग गेस्ट) आवास के रूप में किया जा रहा था। हादसे के बाद भी मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है और बचाव तथा राहत का कार्य अभी भी युद्धस्तर पर जारी है। इस हृदय विदारक घटना का एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें इमारत के अचानक ढहने के बाद बाहर बैठे एक व्यक्ति को अपनी जान बचाने के लिए तेजी से भागते हुए देखा जा सकता है, जो उस भयावह पल की गंभीरता को दर्शाता है।

हादसे के जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली सरकार ने एक विशेष जांच समिति का गठन किया है। यह समिति पूरी घटना की गहन जांच कर रिपोर्ट सौंपेगी। वहीं, पुलिस की कई टीमें इमारत के फरार मालिक की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं, ताकि उसे जल्द से जल्द पकड़ा जा सके और हादसे के लिए जवाबदेही तय की जा सके। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के जवान मलबे में फंसे छात्रों को सुरक्षित निकालने के लिए अत्याधुनिक तकनीक और विशेष उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं। मलबे के नीचे जीवन के संकेतों का पता लगाने के लिए लाइफ डिटेक्टर, प्रशिक्षित खोजी कुत्ते और मलबे को काटने के लिए आधुनिक मशीनों का प्रयोग किया जा रहा है।

हादसे की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ की दो टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और लगभग 70 जवानों ने अलग-अलग हिस्सों में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। जरूरत पड़ने पर बचाव अभियान को और तेज करने के लिए दो अतिरिक्त टीमों को भी रिजर्व में रखा गया है। जवानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना था कि भारी मलबे के नीचे कोई व्यक्ति जीवित फंसा है या नहीं। जीवन के संकेत मिलने के बाद जवानों ने तेजी दिखाते हुए मात्र 15 मिनट में एक अचेत युवक को मलबे से बाहर निकाला, जबकि दो अन्य को लगभग 30 मिनट में सुरक्षित निकाल लिया गया।

फंसे लोगों की सटीक लोकेशन मिलने पर एनडीआरएफ की टीमों ने ब्रीचिंग और कटिंग तकनीकों का सहारा लिया। डायमंड चेन सॉ की मदद से कंक्रीट के बड़े टुकड़ों को काटा गया, वहीं हाइड्रोलिक जैक और कॉम्बी कटर का उपयोग कर भारी मलबे को हटाकर अंदर तक पहुंचने का रास्ता बनाया गया। बचाव कार्य के दौरान प्लाज्मा कटर का भी इस्तेमाल किया गया। मलबे के अस्थिर हिस्सों को सहारा देने के लिए उच्च-क्षमता वाले इन्फ्लेटेबल बैग्स और शोरिंग उपकरण लगाए गए, ताकि बचाव कर्मियों और अंदर फंसे लोगों के लिए कोई और खतरा न हो।

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